चंडीगढ़। हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कर रहे निजी अस्पतालों ने स्वास्थ्य विभाग के विरुद्ध फिर से मोर्चा खोल दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) की हरियाणा शाखा ने चेतावनी दी है कि यदि लंबित भुगतान और अन्य समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो राज्य के आयुष्मान पैनल में शामिल अस्पताल पांच जून की मध्यरात्रि से योजना के तहत नये मरीजों को भर्ती करना बंद कर देंगे।

आइएमए हरियाणा की प्रधान डा. सुनीला सोनी, महासचिव डा. योगेश जिंदल और डा. अजय महाजन ने आयुष्मान भारत हरियाणा हेल्थ प्रोटेक्शन अथारिटी के सीइओ को पत्र लिखकर कहा है कि अस्पतालों के करोड़ों रुपये के भुगतान महीनों से अटके हुए हैं। संगठन का आरोप है कि 16 अप्रैल 2026 को हुई आनलाइन बैठक में सरकार की ओर से लंबित दावों के निपटारे का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पत्र में कहा गया है कि योजना के तहत दावों का भुगतान एमओयू के अनुसार 15 दिनों में होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में तीन से पांच महीने की देरी हो रही है। कुछ प्रक्रियाओं के भुगतान छह से नौ महीने तक लंबित हैं। आइएमए ने आरोप लगाया कि जुलाई 2023 से लगातार अस्पतालों को अपने भुगतान के लिए सरकार के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और पिछले तीन वर्षों में चार बार काम बंद करने की नौबत आ चुकी है।

आइएमए ने यह भी कहा कि अक्टूबर 2022 में शुरू की गई चिरायु योजना के बाद हरियाणा की 80 से 90 प्रतिशत आबादी योजना के दायरे में आ गई, लेकिन सरकार ने उसके अनुरूप बजट उपलब्ध नहीं कराया। इसके अलावा टीएमएस-2 पोर्टल लागू होने के बाद कई तकनीकी समस्याएं और “मिस्ड केस” सामने आए, जिनका भुगतान अब तक नहीं हुआ है।

आइएमए का आरोप है कि कई मामलों में मामूली त्रुटियों को भी “फ्राड” मानकर अस्पतालों को डी-एंपैनल कर दिया गया। साथ ही राज्य स्तरीय एंपैनलमेंट और ग्रिवांस कमेटियों की बैठकें पिछले 7-8 महीनों से नहीं की गई हैं, जो कि उचित नहीं है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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