उत्तर भारत में गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। सुबह से लेकर शाम तक प्रचंड गर्मी लोगों को खूब सता रही है। ऊपर से गरम हवा और लू के थपेड़ो ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। भीषण गर्मी में पारा 45 डिग्री तक पहुंच गया है। गर्मी से बचाव के लिए लोग जूस आदि ठंडे पेय पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। गर्मी के चलते लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है। मजबूरी में घरों से बाहर निकलना पड़ रहा है।

गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से लू यानी हीट वेव लगने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर धूप में घूमने वालों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। लू लगने पर उसके इलाज से बेहतर है, हम लू से बचे रहें। यानी बचाव इलाज से बेहतर है। डीसी अभिषेक मीणा ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जनहित में लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई है, जिसका सभी पालन करते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा बनाए रखें।

प्रशासन ने आमजन से आह्वान किया कि प्रशासन की ओर से जारी की गई एडवाइजरी की पालना करें और हीट वेव से बचे रहें। उन्होंने बताया कि हीट वेव से बचाव के लिए स्थानीय मौसम संबंधी खबरों के लिए रेडियो सुनें, टीवी देखें, समाचार पत्र पढ़ें। गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहने, अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट अथवा छतरी का उपयोग करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं-भले ही प्यास न लगी हो, ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन), घर में बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का मांड) नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन कर तरोताजा रहें। पार्किंग के समय बच्चों को वाहनों में छोडक़र न जाएं, उन्हें लू लगने का खतरा हो सकता है, नंगे पांव बाहर न जाएं, गर्मी से राहत के लिए हाथ का पंखा अपने पास रखें, काम के बीच में थोड़ा-थोड़ा विश्राम लें, खेत खलिहान में काम कर रहे हैं तो समय-समय पर पेड़ या छाया में आसरा लें। गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन न करें। ताजे फल, सलाद तथा घर में बना खाना खाएं। खासतौर से दोपहर 12 बजे से सायं 3 बजे के बीच धूप में सीधे ना जाएं। यदि बच्चे को चक्कर आए, उल्टी, घबराहट अथवा तेज सिरदर्द हो, सीने में दर्द हो अथवा सांस लेने में कठिनाई हो तो चिकित्सक को दिखाएं।

डीसी अभिषेक मीणा ने कहा कि गर्मी में वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों व छोटे बच्चों की खास देखभाल करें। तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें। ध्यान रहे कि उनके पास फोन हो। इसके अलावा यदि वे गर्मी से बेचैनी महसूस कर रहे हों तो उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें, उनके शरीर को गीला रखें, उन्हें नहलाएं अथवा उनकी गर्दन तथा बगलों में गीला तौलिया रखें, उनके शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ आवश्यक लगे तो डॉक्टर को दिखाएं। वहीं हमेशा उनके पास पानी जरूरी रखें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *