कुरुक्षेत्र, 20 मई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में महिला संकाय सदस्य अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार और महिला सशक्तिकरण की प्रेरक शक्ति बनकर उभर रही हैं। विश्वविद्यालय की महिला शिक्षिका न केवल उच्च स्तरीय शोध परियोजनाओं का सफल नेतृत्व कर रही हैं, बल्कि युवा शोधार्थियों और छात्राओं को भी वैज्ञानिक एवं सामाजिक विकास की दिशा में प्रेरित कर रही हैं।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि विश्वविद्यालय की महिला संकाय सदस्य ज्ञान, अनुसंधान और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। महिला शोधकर्ताओं की प्रतिबद्धता, नेतृत्व क्षमता और नवाचार आधारित दृष्टिकोण विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रहा है। महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ उनका शोध कार्य विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि विश्वविद्यालय में नवाचार एवं शोधोन्मुख वातावरण तैयार किया गया है, जहां महिला वैज्ञानिकों और शिक्षकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं। यही कारण है कि विश्वविद्यालय की महिला संकाय आज बहु-संस्थागत अनुसंधान परियोजनाओं का सफल नेतृत्व कर रही हैं। विश्वविद्यालय में विभिन्न वित्तपोषण एजेंसियों द्वारा स्वीकृत 65 शोध परियोजनाओं में से 23 परियोजनाओं का नेतृत्व महिला संकाय प्रधान अन्वेषक के रूप में कर रही हैं, जबकि 3 परियोजनाओं में वे सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में योगदान दे रही हैं। इनमें से 16 परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुकी हैं तथा 6 परियोजनाएं वर्तमान में प्रगति पर हैं। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की सशक्त अनुसंधान संस्कृति और महिला नेतृत्व की सफलता को दर्शाती है।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की महिला संकाय की उपलब्धियां यह सिद्ध करती हैं कि जब महिलाओं को अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन मिलता है तो वे शिक्षा, अनुसंधान और समाज निर्माण के हर क्षेत्र में उत्कृष्टता स्थापित करती हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी महिला शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और अनुसंधान के नए आयाम स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि भौतिकी विभाग की प्रो. सुमन मेंहदिया स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अत्याधुनिक शोध कार्यों का नेतृत्व कर रही हैं। उनके शोध में फोटो-इलेक्ट्रोकेमिकल जल-विभाजन द्वारा हाइड्रोजन उत्पादन, सुपरकैपेसिटर एवं बैटरियों के लिए ऊर्जा भंडारण और पॉलिमरिक अपशिष्ट को उच्च मूल्य के कार्बन नैनोमैटेरियल में परिवर्तित करने जैसे नवाचार शामिल हैं। उनका शोध हरित ऊर्जा और परिपत्र अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान कर रहा है। महिला अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र की प्रो. अनीता दुआ के नेतृत्व में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के प्रभाव का मूल्यांकन किया जा रहा है। यह अध्ययन बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का विश्लेषण करते हुए नीति निर्माण में उपयोगी सुझाव प्रदान कर रहा है। प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि अर्थशास्त्र विभाग की प्रो. हेमलता शर्मा, डॉ. प्रिया शर्मा और डॉ. प्रीति शर्मा द्वारा हरियाणा के अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार कौशल अंतर पर शोध किया जा रहा है। यह अध्ययन रोजगार योग्यता बढ़ाने तथा सतत आजीविका को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण नीति संबंधी सुझाव प्रदान करता है। उन्होंने बताया क इसी प्रकार जैव रसायन विभाग की प्रो. सुमन ढांडा स्वदेशी नस्लों के पशुओं के कोलोस्ट्रम से प्राप्त लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया पर उन्नत शोध कर रही हैं। उनका यह शोध मानव एवं पशु स्वास्थ्य, कार्यात्मक खाद्य पदार्थों और डेयरी जैव-प्रौद्योगिकी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
