कुरुक्षेत्र, 7 मई।   जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मंजू शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद में वर्णित अनुशस्त्र कर्म ( पैरासर्जिकल ) चिकित्सा पद्धतियाँ आज भी विभिन्न जटिल रोगों के प्रबंधन में प्रभावी सिद्ध हो रही है। योग मेें आसन, श्वास व्यायाम और ध्यान शामिल हैं, जो विद्यार्थियों, वयस्कों और बुजुर्गों के लिए आसानी से सुलभ हैं। प्रतिदिन योग का अभ्यास करने से लचीलापन, शक्ति और सहनशक्ति में वृद्धि होती है और मन शांत होता है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार होता है।
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मंजू शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद में वर्णित रक्तमोक्षण जैसी पैरासर्जिकल चिकित्सा पद्धतियाँ सिरागत वात, शोथ एवं वेदनाजन्य विकारों में अत्यंत उपयोगी हैं। उचित रोगी चयन एवं चिकित्सकीय निगरानी में ओपीडी स्तर पर भी सुरक्षित एवं प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मसरोवर में चल रहे राजस्व एवं बाढ़ प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन प्रशिक्षकों के लिए आयुष विभाग द्वारा विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया है। इस योग सत्र में लगभग 27 प्रशिक्षकों ने भाग लिया। योग अभ्यास योग विशेषज्ञ मनजीत एवं योग सहायक रजत द्वारा करवाया गया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में वर्णित पराशल्य चिकित्सा पद्धतियाँ रक्तमोक्षण एवं अग्निकर्म एवं जलौकावचारण आज भी अनेक दर्द एवं सूजन संबंधी रोगों में प्रभावी सिद्ध हो रही हैं।
आयुर्वेद में रक्तमोक्षण को एक महत्वपूर्ण पैरासर्जिकल चिकित्सा माना गया है, जिसका उद्देश्य दूषित रक्त को शरीर से बाहर निकालकर रोग की मूल विकृति को कम करना है।
उन्होंने कहा कि अग्निकर्म विशेष रूप से एड़ी दर्द, घुटना दर्द, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, कमर दर्द, कॉर्न, टेनिस एल्बो एवं अन्य वातजन्य पीड़ाओं में उपयोगी माना जाता है। वहीं जलौकावचारण  रक्तदुष्टि, सूजन, त्वचा रोग में लाभकारी पाया गया है। इस मौके पर कर्मवीर, हरदीप सिंह, राय सिंह, रोहतास कुमार, दीपक कुमार, वीरेंद्र सिंह एवं भीम सिंह उपस्थित रहे।

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