पंचकूला। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर पंचकूला औद्योगिक प्लॉट आवंटन मामले में शिकंजा कसता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें इस कथित घोटाले का ‘केंद्रीय साजिशकर्ता’ करार दिया है और कार्रवाई तेज करने के संकेत मिल रहे हैं।

मामले में सीबीआई भी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिससे यह मामला और संवेदनशील बन गया है। ईडी ने दायर प्रासिक्यूशन कंप्लेंट (पीसी) में दावा किया है कि औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन की पूरी ‘स्क्रिप्ट’ खुद हुड्डा ने लिखी।

आरोप है कि पात्रता के नियमों में मनमाने बदलाव कर कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, ‘अनुभव’ और ‘योग्यता’ जैसे मानदंडों को हटाकर प्रक्रिया को कमजोर किया गया, जबकि ‘वित्तीय क्षमता’ के अंक 25 से घटाकर 10 कर दिए गए।
इसके विपरीत, ‘वाइवा-वोचे’ के अंक 15 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए, जिससे इंटरव्यू बोर्ड को खुली छूट मिल गई। ईडी का कहना है कि इन बदलावों के जरिए ऐसे आवंटियों को लाभ पहुंचाया गया, जिनके पास न तो पर्याप्त अनुभव था और न ही मजबूत वित्तीय स्थिति।

कई आवंटी सीधे तौर पर हुड्डा के परिचितों, रिश्तेदारों या राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों से संबंध रखते थे। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आवंटियों का संबंध उनके पैतृक गांव सांघी से था, जबकि कुछ उनके करीबी सहयोगियों और राजनीतिक संपर्कों के जरिए जुड़े हुए थे।

इस मामले में कुल 582 लोगों ने आवेदन किया था, लेकिन केवल 14 को ही प्लॉट आवंटित किए गए। ईडी के अनुसार, जिन प्लॉटों की वास्तविक कीमत करीब 30.34 करोड़ रुपये थी, उन्हें मात्र 7.85 करोड़ रुपये में दे दिया गया ,जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।

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