बहादुरगढ़। शहर के सिविल अस्पताल की हालत सुधारने के लिए साढ़े छह करोड़ का प्रस्ताव तो कई महीने पहले मंजूर हो गया, लेकिन इसका बजट अब तक नहीं मिला है। अस्पताल प्रबंधन की सिफारिश पर लोक निर्माण विभाग ने सिविल अस्पताल के सभी चारों ब्लाक को मिलाकर व्यापक सुधार के लिए साढ़े छह करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया था।

इसको अस्पताल प्रबंधन की ओर से भेजा गया था। बाद में सरकार ने इसे मंजूर कर लिया, मगर बजट मिले तो बात बने। इस राशि से मेडिकल उपकरणों को छोड़कर बाकी सभी तरह के सुधार शामिल हैं। बजट कब मिलेगा यह साफ नहीं है, क्योंकि बजट के इंतजार में ही सिविल अस्पताल में छह मंजिला भवन का कार्य भी लगभग दो साल से ठप है।
दरअसल, सिविल अस्पताल के पुराने भवन के कई हिस्से तो बेहद जर्जर हो चुके हैं। छत से मलबा टूटकर गिर रहा है। इससे कभी भी कोई हादसा हो सकता है। पुराने भवन में छत के नीचे काम करने में कर्मचारी भी घबराते हैं। पुराने इमरजेंसी वार्ड के मेन गेट के पास ही बने बरामदे में भी ऐसे ही हालात हैं। यहां से तो मरीजों का भी आना-जाना होता है।

रोजाना आते हैं सैकड़ों मरीज

ऐसे में स्टाफ ही नहीं बल्कि मरीज भी खतरे के साये से गुजरते हैं। अस्पताल के इस पुराने भवन को बने हुए तीन दशक से ज्यादा समय हो चुका है। इस भवन में टीबी विभाग, आयुर्वेद, होम्योपैथी, योगा, एक्सरे, ईसीजी, इंजेक्शन रूम के अलावा अब पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन की व्यवस्था भी यहीं पर है। ऐसे में यहां पर रोजाना सैकड़ों मरीज आते-जाते हैं।

पुराने भवन के गेट से होकर गैलरी ओपीडी तक जाती है। ऐसे में दूसरे हिस्सों में स्थित विभागों के मरीज भी पुराने भवन से ही होकर गुजरते हैं। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में जब पुराना भवन जर्जर है तो किसी के लिए भी कोई भी खतरा पैदा हो सकता है। छत का मलबा टूटकर गिर रहा है, तो वहां से गुजरना खतरे से खाली नहीं।

सिर्फ प्रवेश द्वार के पास ही नहीं बल्कि गैलरी और कमरों के अंदर भी छत अब पुरानी हो चुकी है और मरम्मत की दरकार है। अस्पताल में कई बिंदुओं पर अव्यवस्था तो है ही, जिससे मरीज परेशान होते हैं, लेकिन जर्जर भवन के कारण तो उनके लिए चोट लगने का खतरा भी बना हुआ है।

अस्पताल में रोजाना नए व पुराने मिलाकर एक हजार से ज्यादा मरीज आते हैं। लोगों का कहना है कि अस्पताल में तो इलाज के साथ ही स्वच्छता व सुरक्षा भी जरूरी है। इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। लोक निर्माण विभाग ने जो प्रस्ताव तैयार किया गया, उसमें शौचालयों का भी सुधार शामिल है। क्योंकि अस्पताल में शौचालयों की हालत ठीक नहीं है। यहां पर पोस्टमार्टम हाउस की हालत भी खराब है। भवन में कमी के कारण ही चूहे अंदर घुस जाते हैं।

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