करनाल, 17 अप्रैल।  उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने बताया कि गेहूं की फसल की कटाई का कार्य जारी है। फसल कटाई के बाद किसान अक्सर फसल अवशेषों को आग लगा देते हैं ऐसा करने से न केवल हमारी भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है बल्कि हमारा पर्यावरण भी दूषित होता है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि खेतों में गेहूं की फसल कटाई के बाद फानों में आग न लगाएं, बल्कि उनका समुचित प्रबंधन करें। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से हमारा पर्यावरण दूषित होता है जिसकी वजह से हमें भंयकर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। फसल अवशेष जलाने से हमारी पैदावार पर असर पड़ता है और उत्पादन लागत अधिक और आमदनी कम हो जाती है। इसके अलावा पर्यावरण प्रदूषण, भूमि की उर्वरा शक्ति का कम होना, लाभदायक कीट/जीवाणुओं का समाप्त होना तथा मनुष्य के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। साथ ही सम्पत्ति व जान-माल की हानि का भी डर बना रहता है। साथ ही पशु चारे में कमी आती है जबकि इन फसल अवशेषों से तूड़ी बनाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने की समस्या को रोकने के लिए पर्यावरण विभाग हरियाणा ने वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 19(5) के प्रावधानों के अंतर्गत पूरे प्रदेश में गेहूं के अवशेषों को जलाने पर रोक लगाई हुई है। आगजनी करने वाले किसानों पर आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान किया गया है जिसमे 2 एकड़ तक 5 हजार रुपये, 5 एकड़ तक 10 हजार रुपये तथा 5 एकड़ से ज्यादा 30 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही आगजनी के दोषी किसान के खिलाफ वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत धारा 39 व भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के अंतर्गत धारा 223 (ए) के अंतर्गत सम्बंधित थाना में एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी व उसके मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाएगी, जिससे आगजनी के दोषी किसान अगले दो सीजन अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पाएंगे ।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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