89 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल व प्रमाण पत्र देकर किया सम्मानित
सर्वोच्च न्यायालय, भारत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल को विश्वविद्यालय की तरफ से दी मानद उपाधि, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति शील नागू ने भी दीक्षांत समारोह में शिरकत, दीक्षांत समारोह की स्मारिका का किया विमोचन, केयू का 35वां दीक्षांत समारोह में करीब 3000 विद्यार्थियों को पीएच.डी. यूजी और पीजी की डिग्री देकर किया सम्मानित
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में 35वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि के रूप में बोल रहे थे। इससे पहले राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के अनुमोदन पर सर्वोच्च न्यायालय, भारत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल को विश्वविद्यालय की तरफ से डाक्टर ऑफ लॉ में मानद उपाधि देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में अलग-अलग विषयों में पीएच.डी के 112 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान दी और 89 विद्यार्थियों को अपनी-अपनी कक्षाओं में टाप करने पर गोल्ड मैडल और प्रमाण देकर सम्मानित किया। इस दीक्षांत समारोह में पीएच.डी सहित पीजी और यूजी के करीब 3000 विद्यार्थियों को डिग्री देकर सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह में दीक्षांत समारोह की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की तरफ से राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता, न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी, न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश भारद्वाज, न्यायाधीश न्यायमूर्ति अलका सरीन को सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया।
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने विद्यार्थियों से नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। आज का दीक्षांत समारोह केवल शिक्षा की यात्रा का समापन नहीं बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। राज्यपाल ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य एक राष्ट्रीय मिशन है, जिसके वास्तविक शिल्पकार देश के युवा हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पारंपरिक नौकरी तक सीमित न रहने और नौकरी मांगने के बजाय नौकरी देने वाले बनने की प्रेरणा दी।
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश बिंदल को डॉक्टर ऑफ लॉ (मानद) उपाधि प्रदान किए जाने पर बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके विधि और न्याय क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान की पहचान है। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय बताया कि न्यायमूर्ति बिंदल इसी संस्थान के पूर्व छात्र भी हैं। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। विश्वविद्यालय को नैक से ए$$ ग्रेड प्राप्त हुआ है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हरियाणा सरकार द्वारा प्लैटिनम अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने शोध, पेटेंट, नए शैक्षणिक कार्यक्रमों और इंडस्ट्री 4.0 से जुड़े आधुनिक विषयों में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन भूमि भगवद्गीता के उस संदेश की याद दिलाती है कि व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से शिक्षा के साथ-साथ मूल्यों को भी जीवन में अपनाने की अपील की।
राष्ट्र सशक्त होगा तभी सभी सशक्त होंगेः न्यायमूर्ति राजेश बिंदल
सर्वोच्च न्यायालय, भारत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने कहा कि यदि राष्ट्र सशक्त होगा, तो हम सभी स्वतः सशक्त होंगे। यदि हम केवल अपनी व्यक्तिगत प्रगति के बारे में सोचेंगे, तो हम अपने कर्तव्यों का पूर्ण रूप से निर्वहन नहीं कर पाएँगे। क्योंकि जो कुछ भी हमें मिला है, वह इसी राष्ट्र की देन है। इसलिए राष्ट्र के प्रति योगदान देना हमारा पहला और सबसे बड़ा कर्तव्य है।
उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने मुझे इस सम्मानित मानद उपाधि से अलंकृत किया। साथ ही, मैं उन सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देता हूँ जो आज अपनी डिग्रियाँ प्राप्त कर रहे हैं। यह क्षण आपके परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है।
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पावनधरा का एक विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह विश्वविद्यालय पवित्र ब्रह्म सरोवर के समीप स्थित है। मान्यता है कि सृष्टि की रचना के समय भगवान ब्रह्मा ने यहीं यज्ञ किया था। इस पावन परंपरा से हमें एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश मिलता है कि हमें सृजनकर्ता बनना है, विनाशकर्ता नहीं। यही इस पवित्र भूमि से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख है। जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थितियाँ क्यों न आएँ, हमें सदैव सकारात्मक सोच रखनी चाहिए और कुछ नया, कुछ अच्छा सृजन करने का प्रयास करते रहना चाहिए।
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने कहा कि आज के समय की एक बड़ी चुनौती तकनीक भी है। हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के युग में जी रहे हैं। ये तकनीकें एक ओर अपार अवसर प्रदान करती हैं, वहीं दूसरी ओर कई गंभीर चुनौतियाँ भी सामने लाती हैं। इसलिए तकनीक का उपयोग अवश्य करें, उससे सीखें और लाभ उठाएँ, लेकिन उस पर पूर्णतः निर्भर कभी न हों क्योंकि कभी-कभी तकनीक भ्रमित भी कर सकती है। इसलिए अपनी सोच, विवेक और निर्णय क्षमता को सदैव सर्वाेपरि रखें।
दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआतः प्रो. सोमनाथ सचदेवा
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान ही नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी गीता के उपदेश को अपने जीवन में आत्मसात करें, जो उनको सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जीवन में आगे बढ़ते हुए अनेक चुनौतियाँ आएँगी। ऐसे समय में विश्वविद्यालय का ध्येय वाक्य “योगस्थः कुरु कर्माणि” सदैव स्मरण रखें, जिसका अर्थ है कि सफलता और असफलता दोनों परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखते हुए अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना। उन्होंने कहा कि आज का दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नई उड़ान की एक नई शुरुआत है।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को नैक द्वारा ए-प्लस-प्लस का सर्वाेच्च ग्रेड प्राप्त है और यह हरियाणा का एकमात्र राज्य विश्वविद्यालय है जिसे यह गौरव मिला है। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को सर्वप्रथम सफलतापूर्वक लागू करते हुए साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में 28 नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए हैं तथा पिछले वर्षों में लगभग 64 पेटेंट प्राप्त किए हैं। खेलों में विश्वविद्यालय ने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी में लगातार दो वर्षों तक तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जबकि सांस्कृतिक गतिविधियों में देश के सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रथम स्थान हासिल किया है। पर्यावरण संरक्षण के तहत यहाँ का प्रत्येक विद्यार्थी एक पौधा लगाता है, जिसके परिणामस्वरूप हर वर्ष लगभग 75 हजार पौधे लगाए जाते हैं। मंच का संचालन युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने किया।
इस अवसर पर राज्यपाल की धर्मपत्नी मित्रा घोष, डॉ. ममता सचदेवा, उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां की कुलपति प्रो. सुदेश छिक्कारा, श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करतार सिंह धीमान, कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. ब्रजेश साहनी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर. चौधरी, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. प्रीति जैन, प्राक्टर प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. सुनील ढींगरा, प्रो. भगवान सिंह चौधरी, प्रो. डी.एस. राणा, प्रो. आरके. मोदगिल, प्रो. रीटा, प्रो. परमेश कुमार, प्रो कुसुमलता, डॉ. जितेन्द्र खटकड़, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, उप-निदेशक डॉ. जिम्मी शर्मा सहित विश्वविद्यालय के कार्यकारिणी सदस्य, कोर्ट के सदस्य, डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थी मौजूद थे।
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दीक्षांत समारोह का सामूहिक फोटो बना यादगार
दीक्षांत समारोह के अवसर पर सामूहिक फोटो की विशेष व्यवस्था की गई थी जिसमें राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष व हरियाणा राज्य की प्रथम महिला श्रीमती मित्रा घोष, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व उनकी धर्मपत्नी, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता, न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी, न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश भारद्वाज, न्यायाधीश न्यायमूर्ति अलका सरीन, कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा सहित विभिन्न संकायों के डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षकों का समूह फोटोग्राफ लिया गया जो सभी के यादगार बना।
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने किया बहुमंजिला डी-टाईप आवासीय भवन का लोकार्पण
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचेदवा ने कहा कि शिक्षकों को सुविधाओं प्रदान करना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। उसी कड़ी में शिक्षकों के लिए 20 डीटाईप आवासीय मकानों का निर्माण किया गया है। शिक्षकों की यह पुरानी मांग थी जिसको प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया है।
इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय, भारत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी, न्यायाधीश न्यायमूर्ति अलका सरीन, कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल मौजूद रहे।
