युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना गुरुकुल का मुख्य उद्देश्य-आचार्य देवव्रत जी
9वीं और 11वीं में प्रवेश हेतु आए तीन हजार से अधिक छात्र व अभिभावक

सोनिका वधवा

कुरूक्षेत्र। संस्कारों के अभाव और उचित मार्गदर्शन के अभाव में आज की युवा पीढ़ी भारतीय जीवन मूल्यों से दूर होती जा रही है जो अभिभावकों के साथ-साथ समाज के लिए भी चिंता का विषय है। गुरुकुल शिक्षा पद्धति में छात्रों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के साथ-साथ उन्हें मानवीय मूल्यां व वैदिक संस्कारों से पोषित किया जाता है ताकि वह बुढ़ापे में मां-बाप की लाठी बनें और उनकी खूब सेवा करें। उक्त शब्द गुजरात के महामहिम राज्यपाल आचार्य श्री देवव्रत जी ने आज गुरुकुल ज्योतिसर में आयोजित ‘गुरुकुल शिक्षा उत्सव’ में पधारे अभिभावकों व छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहे। इस अवसर पर वैदिक विद्वान् डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार, गुरुकुल कुरुक्षेत्र के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. प्रवीण कुमार, जगदीश आर्य, शिवकुमार आर्य, महिन्द्र आर्य, आर्यकुलम के प्राचार्य दिनेश राणा, गुरुकुल ज्योतिसर के प्राचार्य अरूण आर्य, श्रीमती कविता चौधरी व अन्य महानुभाव मौजूद रहे।
आचार्यश्री ने कहा कि गुरुकुल में छात्रों का सर्वांगीण विकास होता जिसमें उत्तम स्वास्थ्य, उत्तम शिक्षा और उत्तम विचार मुख्य है। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को साकार करने की दिशा में गुरुकुल अहम भूमिका निभा रहा है क्योंकि गुरुकुल में बच्चों को अक्षरज्ञान के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों की गतिविधियों से भी अवगत कराया जाता है। उन्हें प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाता है, गुरुकुल की अत्याधुनिक गोशाला में पशुपालन की पूरी जानकारी दी जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली अक्सर तनाव और अत्यधिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है, जबकि गुरुकुल शिक्षा एक संतुलित, मूल्य-आधारित और तनाव-मुक्त वातावरण प्रदान करती है। उन्होंने एक सशक्त और जिम्मेदार भविष्य पीढ़ी के निर्माण के लिए भारतीय परंपराओं से पुनः जुड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
वैदिक विद्वान् डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार ने गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रणाली भारतीय संस्कृति और परंपराओं में गहराई से निहित है तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास पर बल देती है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सशक्त चरित्र का निर्माण करती है, जिससे विद्यार्थी केवल शैक्षणिक सफलता ही नहीं बल्कि जीवन के लिए भी तैयार होते हैं।
गुरुकुल के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. प्रवीण कुमार ने अपने उद्बोधन में गुरुकुल की शैक्षिक उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि सत्र 2024-25 में गुरुकुल कुरुक्षेत्र से 13, गुरुकुल ज्योतिसर से 06 तथा गुरुकुल नीलोखेड़ी से 01 छात्र का एनडीए में चयन हुआ है वहीं छात्र आईआईटी में 7 छात्रों ने सफलता हासिल की। एनआईटी और सरकार कॉलेज में एडमिशन की बात करें तो 11 छात्रों ने सफलता पायी जिसमें 09 गुरुकुल कुरुक्षेत्र से तथा 2 गुरुकुल ज्योतिसर कैम्पस से रहे। इसी क्रम में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 06 तथा ज्योतिसर के 02 छात्र नीट में सफल हुए। ट्रीपल आईटी में गुरुकुल के 03 छात्र तथा ज्योतिसर के 02 छात्रों ने सफलता अर्जित की। उन्होंने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र को एजुकेशन वर्ल्ड द्वारा पिछले आठ वर्षों से नंबर वन आवासीय विद्यालय के खिताब से नवाजा गया है वहीं देशभर के स्कूलों को पीछे छोड़ते हुए गुरुकुल को ‘स्कूल एक्सीलेंस अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है जो बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 10 वर्षों में हमारे गुरुकुलों से 84 छात्र एनडीए में, 46 छात्र आईआईटी, 47 छात्र एनआईटी व सरकारी कॉलेज में तथा 18 छात्र नीट में चयनित हुए हैं जो गुरुकुल परिवार के लिए हर्ष का विषय है। 10वीं और 12वीं के सीबीएसई रिजल्ट की बात करें तो गुरुकुल के सभी छात्र अधिकांश छात्र मेरिट प्राप्त करते हैं।
विदित हो कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र सहित गुरुकुल नीलोखेड़ी, आर्यकुलम् नीलोखेड़ी एवं गुरुकुल ज्योतिसर में प्रवेश हेतु ‘गुरुकुल शिक्षा उत्सव’ का आयोजन इस बार गुरुकुल ज्योतिसर कैम्पस में 20 से 22 मार्च तक किया जा रहा है जिसमें बड़ी संख्या में छात्र एवं अभिभावक शामिल हो रहे हैं। 21 मार्च को जहां 7वीं और 8वीं कक्षा हेतु परीक्षा ली जाएगी वहीं 5वीं और छठी कक्षा हेतु 22 मार्च को परीक्षा होगी। परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों की काउंसलिंग परीक्षा के अगले दिन गुरुकुल कुरुक्षेत्र कैम्पस में होगी।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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