कुरुक्षेत्र, 20 मार्च। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा 3 अप्रैल 2026 को आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित गोयल पुरस्कार समारोह में प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. परमजीत खुराना को “व्हीट बायोटेक्नोलॉजी” और “कम्पेरेटिव जीनोमिक्स” के क्षेत्र में  में उत्कृष्ट व उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि वर्ष 1992 से विश्वविद्यालय देश के उत्कृष्ट वैज्ञानिकों को यह सम्मान प्रदान करता आ रहा है। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को 2 लाख रुपये की नकद राशि, स्वर्ण पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। 3 अप्रैल को विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आयोजित इस भव्य समारोह में देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
प्रो. परमजीत खुराना का जन्म 15 अगस्त 1956 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में बी.एससी. (ऑनर्स), परास्नातक, एम.फिल. तथा पीएचडी. की उपाधियां प्राप्त कीं। अपने शैक्षणिक जीवन में उन्होंने एसजीटीबी खालसा कॉलेज, दिल्ली में प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दीं और बाद में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो रहीं। वर्ष 1988 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस स्थित प्लांट मॉलिक्यूलर बायोलॉजी विभाग में अपनी सेवाएं शुरू की और क्रमशः एसोसिएट प्रोफेसर, प्रोफेसर तथा सीनियर प्रोफेसर के पदों पर आसीन रहीं।
प्रो. खुराना ने “व्हीट बायोटेक्नोलॉजी” और “कम्पेरेटिव जीनोमिक्स” के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके नेतृत्व में भारतीय गेहूं की ऐसी उन्नत किस्मों का विकास किया गया जो कीटों और प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति अधिक सहनशील हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने शहतूत (मलबरी) के जीनोम अनुक्रमण सहित चावल, टमाटर और गेहूं के अंतरराष्ट्रीय जीनोम प्रोजेक्ट्स में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रो. खुराना के नाम 200 से अधिक शोध प्रकाशन, लगभग 24 हजार उद्धरण तथा 65 का एच-इंडेक्स दर्ज है। वे इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी सहित कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विज्ञान अकादमियों की फेलो हैं। उन्हें ओ.पी. भसीन अवॉर्ड (बायोटेक्नोलॉजी), के.के. रोहतगी-मुखर्जी अवॉर्ड, डॉ. एस. राजाराम आउटस्टैंडिंग वुमन साइंटिस्ट अवॉर्ड सहित अनेक सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
कुवि के 9 शोधार्थी पीएचडी की उपाधि के पात्र घोषित
कुरुक्षेत्र, 20 मार्च।
 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने शोध समिति और परीक्षकों के बोर्ड की अनुशंसा पर 9 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि के लिए पात्र घोषित किया है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने बताया कि पीएचडी डिग्री के लिए पात्र घोषित किए गए शोधार्थियों में अंग्रेजी विषय से देवेन्द्र सिंह व अनुराधा, हिंदी से अंजू व अनिता, मैनेजमेंट से सुमित सैनी, एजुकेशन से नीतू रानी, संस्कृत से सुदेश रानी, लॉ से पूजा कुमारी व जूलॉजी से निशा शामिल हैं।
केयू यूआईईटी की छात्राओं ने गंगा तट पर की पावन आरती, विश्व शांति की कामना
कुरुक्षेत्र, 20 मार्च। 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में भारतीय नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 तथा हिंदू नववर्ष के प्रथम नवरात्रि के पावन अवसर पर यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) की प्रथम वर्ष की 50 छात्राओं ने गंगा तट पर पावन गंगा आरती में भाग लिया।
कार्यक्रम के समन्वयक लेफ्टिनेंट (डॉ.) अजय जांगड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि छात्राओं ने गंगा मैया के दर्शन कर पवित्र जल का आचमन किया तथा आरती में श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर डॉ. प्रियंका जांगड़ा एवं छात्राओं ने गंगा मैया से विश्व में शांति, सौहार्द और सभी प्रकार के संघर्षों के समाप्त होने की प्रार्थना की।
छात्राओं ने “सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयाः” की भावना के साथ समस्त मानवता के कल्याण का आशीर्वाद मांगा। इस पावन अवसर पर उन्होंने भारत सहित विश्व के सभी देशों में शांति और अहिंसा की कामना करते हुए समाज में सकारात्मकता का संदेश दिया। अंत में छात्राओं ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल एवं उन्नत भविष्य की मंगलकामनाएं भी कीं।
 
गृह विज्ञान विभाग की छात्राओं ने किया शैक्षणिक भ्रमण, सामाजिक संस्थाओं का लिया अनुभव
कुरुक्षेत्र, 20 मार्च।
 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज़  के गृह विज्ञान विभाग की स्नातक छात्राओं ने शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत मिड वे होम  एवं प्रेरणा वृद्धाश्रम  कुरुक्षेत्र का दौरा किया।
मिड वे होम भ्रमण का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की देखभाल, पुनर्वास तथा उनके समग्र विकास की प्रक्रिया को समझना था। इस दौरान छात्राओं ने बच्चों के साथ संवाद किया, रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया तथा उनकी दैनिक दिनचर्या को निकट से जाना। संस्था के सदस्यों ने विद्यार्थियों को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक सहयोग एवं सामाजिक एकीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। इसके पश्चात छात्राओं ने प्रेरणा वृद्धाश्रम का भ्रमण किया, जहां उन्होंने वृद्धजनों से संवाद कर उनके अनुभवों को जाना तथा उनके साथ समय बिताया। विद्यार्थियों ने वृद्धजनों की भावनात्मक एवं सामाजिक आवश्यकताओं को समझने का प्रयास किया और उनके साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया।
डॉ. रजनी गोयल ने बताया कि  इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से छात्राओं में संवेदनशीलता, सहानुभूति एवं सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। यह अनुभव उनके शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक रूप में समझने में सहायक सिद्ध होता है। उन्होंने संस्थाओं द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को ऐसे सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर विभाग की शिक्षिकाएं डॉ. रजनी गोयल, श्रीमती मंजू नरवाल, श्रीमती अनु जोगी, सुश्री प्रियंका एवं श्रीमती श्वेता गोयल उपस्थित रहीं।
विद्यार्थियों को ट्रैफिक नियम अपनी दिनचर्या में शामिल करना जरूरीः प्रो. सुनील ढींगरा
कुरुक्षेत्र, 20 मार्च। 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा के  मार्गदर्शन में यूआईईटी संस्थान, उन्नत भारत अभियान, इको क्लब एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) द्वारा विद्यार्थियों की जागरूकता से संबंधित एक आउटरीच गतिविधि का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डीन इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी तथा यूआईईटी के निदेशक प्रोफेसर सुनील ढींगरा ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आज की भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसके साथ ही सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य रूप से अपनी आदत में शामिल करें तथा चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट का प्रयोग करें।
प्रो. ढींगरा ने यह भी कहा कि ओवरस्पीड से बचना चाहिए और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है, बल्कि भारी जुर्माना भी देना पड़ता है, जो विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ बन सकता है।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के विद्यार्थियों ने यातायात नियमों से संबंधित विभिन्न पोस्टरों के माध्यम से विश्वविद्यालय के द्वितीय एवं तृतीय द्वार पर विद्यार्थियों, कर्मचारियों तथा आम जनता को जागरूक किया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सुनील नैन, सह-संयोजक डॉ. विशाल अहलावत एवं प्रज्ञा चांदी ने बताया कि विश्वविद्यालय में प्रवेश करने वाले ऐसे विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों, जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना था, उन्हें हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित किया गया, जबकि हेलमेट पहनकर आने वालों को गुलाब का फूल देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर डॉ. राजेश कुमार, डॉ. दीपक मलिक, हरनेक सैनी, हरिकेश पपोसा सहित अनेक विद्यार्थी उपस्थि

By Dr. Rajesh Wadhwa

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