चंडीगढ़। भविष्य में जल की उपलब्धता कम होने की चुनौती से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत न केवल नहरों की लाइनिंग ठीक की जाएगी, बल्कि अधिक गहरे भूजल वाले क्षेत्रों में जल दोहन को नियंत्रित करने के साथ-साथ नई जल संरचनाओं और वर्षा के जल के संचयन की नई परियोजनाएं तैयार होंगी।

राज्य सरकार ने नई जल संरचनाओं के लिए करीब 125 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार राज्य की करीब 70 छोटी-बड़ी नहरों का पुनर्वास भी करने की तैयारी में है। इससे जल की बचत तो होगी ही, साथ ही फसलों का उत्पादन भी बढ़ सकेगा।
सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साल 2026-27 के बजट प्रस्तावों में राज्य के खराब नहरी सिस्टम को सुधारने के लिए पर्याप्त धन का प्रविधान है। साल 1976 में आरंभ की गई दक्षिण हरियाणा के लिफ्ट कैनाल सिस्टम की मुख्य नहरों के लिए वर्ष 2014-15 में 451 पंप थे।

444 पंपों का नवीनीकरण किया जा चुका है

तब ये सभी लगभग 35 साल पुराने थे। इनमें से 444 पंपों का नवीनीकरण किया जा चुका है, जिससे इनकी दक्षता वर्ष 2014-15 में जो केवल 40 प्रतिशत रह गई थी, वह अब बढ़कर 95 प्रतिशत से अधिक हो गई है। अब केवल सात पंप वर्ष 1991 से पहले के हैं। साल 2026-27 के बजट में इन सभी सात पंपों को नये पंपों से बदलने का प्रविधान किया गया है।

राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि साल 2026-27 में 1500 किलोमीटर नहरों की लाइनिंग का पुनर्वास किया जाएगा, जिसमें भाखड़ा मेन ब्रांच, सिरसा ब्रांच, एनबीके लिंक चैनल, भालौट सब ब्रांच तथा हाबरी सब ब्रांच सहित करीब 70 नहरें शामिल हैं। साल 2031 तक पूरे राज्य में एक भी नहर ऐसी नहीं होगी, जिसकी लाइनिंग का पुनर्वास शेष रह जाएगा।

हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण अति दोहित क्षेत्रों में जल दोहन को नियंत्रित करने के साथ-साथ शुल्क से प्राप्त राशि का उपयोग नई जल संरचनाओं एवं वर्षा जल संचयन हेतु करता है। प्रदेश सरकार ने तय किया है कि साल 2026-27 में प्राधिकरण द्वारा 125 करोड़ रुपये की राशि नई जल संरचनाओं पर खर्च होगी।

एक बूंद-अधिक फसल कार्यक्रम के अंतर्गत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणामियों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने 1.25 लाख एकड़ अतिरिक्त क्षेत्र को शामिल करने का निर्णय लिया है। साथ ही, 2200 नये आन-फार्म वाटर टैंकों का निर्माण होगा।

100 गांवों में दो से 10 एकड़ भूमि पर अनुदान राशि

इसके अतिरिक्त पूरे राज्य की सभी पंचायतों से आग्रह कर हर जिले में कम से कम 100 गांवों में दो से 10 एकड़ पंचायती भूमि पर ग्राम पंचायत को अनुदान राशि तथा हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण के सहयोग से वाटर बाडीज बनाने की सरकार की योजना है। वाटर बाडीज जमीन की सतह पर पानी का कोई भी महत्वपूर्ण संचय है।

बाढ़ सुरक्षा कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर जल के कुशल एवं समान वितरण के लिए स्काडा प्रणाली हथनीकुंड बैराज व जेएलएन पंप हाउस सालावास की स्थापना की जा चुकी है व 180 स्थानों पर रियल टाइम डाटा एक्यूजेशन सिस्टम (आरटीडीएएस) कार्यरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *