स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के कार्यकारी वाइस चेयरमैन सुभाष चंद्र ने की सराहना, ग्रामीणों ने बताया युवाओं के लिए मिसाल
करनाल, 12 मार्च– दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ गांव कालरों के युवा आशीष राणा ने एक सराहनीय और प्रेरणादायक कदम उठाते हुए अपनी शादी में मिले 11 लाख रुपये लौटाकर केवल 1 रुपया शगुन के रूप में स्वीकार किया। आशीष राणा के इस फैसले की क्षेत्र में खूब चर्चा हो रही है और लोग इसे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं। जानकारी के अनुसार आशीष राणा का विवाह गांव मोरा, जिला सहारनपुर निवासी करूणा, सुपुत्री जितेंद्र राणा के साथ धूमधाम से सम्पन्न हुआ। विवाह के दौरान लडक़ी पक्ष की ओर से परंपरा के अनुसार 11 लाख रुपये भेंट किए गए थे, लेकिन आशीष राणा ने इस राशि को लेने से इनकार कर दिया और पूरे सम्मान के साथ यह राशि वापस लौटा दी। उन्होंने केवल 1 रुपया शगुन के रूप में स्वीकार कर यह संदेश दिया कि विवाह एक पवित्र बंधन है और इसमें लेन-देन की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। आशीष राणा ने कहा कि दहेज प्रथा समाज के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है और इसे खत्म करने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि विवाह रिश्तों और आपसी सम्मान पर आधारित होना चाहिए, न कि पैसे के लेन-देन पर। आशीष राणा के इस फैसले का स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के कार्यकारी वाइस चेयरमैन सुभाष चंद्र ने भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आशीष हरियाणा पुलिस का कर्मचारी है और मधुबन में तैनात है, इसने जिस साहस और सोच के साथ यह कदम उठाया है, वह समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत होती है और युवाओं को दहेज प्रथा के खिलाफ आगे आने की प्रेरणा मिलती है। वहीं गांव कालरों के सरपंच प्रतिनिधि नरेन्द्र राणा ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आशीष राणा ने अपने इस कदम से पूरे समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के युवा इसी तरह आगे आएं तो दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करना कठिन नहीं होगा। ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने भी आशीष राणा और उनके परिवार की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कदम आने वाली पीढिय़ों के लिए एक प्रेरणा बनेगा और समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा।
