प्रत्येक जीव में परमात्मा का वास : गोविंद मोद्गिल शास्त्री
कुरुक्षेत्र, 27 फरवरी। श्री कृष्ण कृपा गौशाला में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन का शुभारंभ श्रीराम अस्पताल के डॉक्टर अनुज भाटिया उनकी धर्मपत्नी छाया कुमारी तथा अशोक चावला अंबाला निवासी ने दीप प्रज्वलित करके किया। अतिथियों ने भागवत जी आरती उतारी और पुष्प अर्पित किए। प्रसिद्ध कथावाचक गोविंद मोद्गिल शास्त्री जी ने अतिथियों को आशीर्वाद स्वरूप स्मृति चिन्ह भेंट किया। श्री कृष्ण कृपा गौशाला समिति के प्रधान सुनील वत्स तथा अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी की प्रेरणा से गौ संरक्षण हेतु आयोजित भागवत कथा के तीसरे दिन भारी जनसैलाब उमड़ा और श्रद्धालुओं ने संकीर्तन भागवत कथा का श्रवण करके पुण्य अर्जित किया।
व्यासपीठ से भागवत कथा का रसपान करवाते हुए वृंदावन से आए प्रसिद्ध कथावाचक गोविंद मोद्गिल शास्त्री जी ने कहा कि प्रत्येक जीव में परमात्मा का दर्शन करना चाहिए। गोविंद से इतना प्रेम होना चाहिए कि कण-कण में भगवान कृष्ण के दर्शन हो जाए। हर स्थान में गोविंद का दर्शन करना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक स्थान पर गोविंद विराजमान है।
शब्द की महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि शब्द में बहुत गहरी शक्ति होती है और बहुत ऊर्जा होती है, जितना अच्छा बोलोगे समाज में उतनी ही प्रशंसा होगी, इसलिए शब्द बेहद गंभीरता से बोलने चाहिए। इन्द्रियों को वश में करना चाहिए। इन्द्रियों को वश में करने के लिए प्राणायाम और ध्यान लगाना जरूरी है। मन को वश में करने के लिए भी ध्यान लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे हाथ कर्म करने के लिए होते है, नेत्र देखने के लिए होते है, उसी प्रकार मन, मनमोहन के चरणों में लगाने के लिए होता है। मन को भगवान के चरणों में लगाने के लिए भगवत भाव आना जरूरी है और मन को वश में करने के लिए आसन लगाना चाहिए। जब भी जीवन में कष्ट आए तो प्रभु पर छोड़ देना चाहिए। श्वास नियंत्रण पर बल देते हुए शास्त्री जी ने कहा कि प्राणायाम करने से श्वासों पर नियंत्रण होता है। आयु बढ़ने पर व्यक्ति को कम खाना और कम बोल चाहिए। शास्त्री जी ने व्यासपीठ से जब जीवन ये बीता जाए, मेरे श्याम तुम ना आए….. भजन गाया तो उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे। आज की भागवत कथा में भारी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
