काम्यकेश्वर तीर्थ पर मेले की तैयारियों को लेकर हुई बैठक
कुरुक्षेत्र, 11 जनवरी : देशभर में संचालित श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी की प्रेरणा से तीर्थों की संगमस्थली एवं धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के गांव कमौदा में स्थित श्री काम्यकेश्वर महादेव मंदिर एवं तीर्थ पर रविवारीय शुक्ला सप्तमी मेला 25 जनवरी को लगेगा। रविवारीय शुक्ला सप्तमी मेले के लिए श्री जयराम विद्यापीठ के सेवकों द्वारा दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की जा रही है। श्री जयराम संस्थाओं के मीडिया प्रभारी राजेश सिंगला ने बताया कि श्री काम्यकेश्वर तीर्थ पर परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी के मार्गदर्शन में भव्य मेले का आयोजन होगा। मेले की तैयारियों के संबंध में रविवार को श्री काम्यकेश्वर पर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस मौके पर सेवक शुमेन्द्र शास्त्री, ब्रह्मचारी रोहित कौशिक, मास्टर जी, वकील सिंह, सुखदेव, लाल चंद, शीशपाल, पवन कुमार, नरेश कुमार, रोहित कौशिक इत्यादि सहित अनेक सेवक एवं ग्रामीण भी मौजूद रहे।
ऐसी मान्यता है कि प्राचीन तीर्थ में शुक्ला सप्तमी के शुभ अवसर पर स्नान करने से मोक्ष प्राप्त होती है। ग्रामीणों एवं सेवकों द्वारा मेले की तैयारियां की जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि महर्षि पुलस्त्य जी और महर्षि लोमहर्षण जी ने वामन पुराण में काम्यक वन तीर्थ की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए बताया कि इस तीर्थ की उत्पत्ति महाभारत काल से पूर्व की है। एक बार नैमिषारण्य के निवासी बहुत ज्यादा संख्या में कुरुक्षेत्र की भूमि के अंतर्गत सरस्वती नदी में स्नान करने के लिए काम्यक वन में आए थे। वे सरस्वती में स्नान न कर सके। उन्होंने यज्ञोपवितिक नामक तीर्थ की कल्पना की और स्नान किया। फिर भी शेष लोग उस में प्रवेश ना पा सके। तब से मां सरस्वती ने उनकी इच्छा पूर्ण करने के लिए साक्षात कुंज रूप में प्रकट होकर दर्शन दिए और पश्चिम-वाहिनी होकर बहने लगी। इससे स्पष्ट होता है कि काम्यकेश्वर तीर्थ एवं मंदिर की उत्पति महाभारत काल से पूर्व की है।
वामन पुराण के अध्याय 2 के 34 वें श्लोक के काम्यक वन तीर्थ प्रसंग में स्पष्ट लिखा है कि रविवार को सूर्य भगवान पूषा नाम से साक्षात रूप से विद्यमान रहते हैं। इसलिए वनवास के समय पांडवों ने इस धरा को तपस्या के लिए अपनी शरणस्थली बनाया। द्यूत-क्रीड़ा में कौरवों से हारकर अपने कुल पुरोहित के साथ 10 हजार ब्राह्मणों के साथ यहीं रहते थे।
श्री जयराम विद्यापीठ के ब्रह्मचारी रोहित कौशिक एवं सेवक सुमिंद्र शास्त्री ने बताया कि मंदिर में 25 जनवरी को रविवारीय शुक्ला सप्तमी मेला लगेगा। उनके अनुसार इसी पावन धरा पर पांडवों को सांत्वना एवं धर्मोपदेश देने हेतु महर्षि वेदव्यास जी, महर्षि लोमहर्षण जी, नीतिवेता विदुर जी, देवर्षि नारद जी, बृहदश्व जी, संजय एवं महर्षि मार्कंडेय जी पधारे थे। इतना ही नहीं द्वारकाधीश भगवान श्रीकृष्ण जी अपनी धर्मपत्नी सत्यभामा के साथ पांडवों को सांत्वना देने पहुंचे थे। पांडवों के वंशज सोमवती अमावस्या, फल्गू तीर्थ के समान शुक्ला सप्तमी का इंतजार करते रहते थे।

फोटो परिचय : मेले की तैयारी को लेकर बैठक में शामिल लोग एवं श्री काम्यकेश्वर तीर्थ एवं सरोवर।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

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