-डॉक्टरों ने हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने की सलाह दी थी,अब बुजुर्ग पूरी तरह स्वस्थ

कुरुक्षेत्र। पिछले पांच वर्षों से कूल्हे के असहनीय दर्द से जूझ रहे 61 वर्षीय बुजुर्ग को आयुर्वेदिक उपचार से बड़ी राहत मिली है। पानीपत निवासी रूपचंद की एमआरआई रिपोर्ट में बाएं कूल्हे में ग्रेड-4 ऑस्टियोआर्थराइटिस की पुष्टि होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने की सलाह दी थी, लेकिन वर्ष 2023 में रूपचंद ने श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के पंचकर्म विभाग में डॉ. राजा सिंगला से आयुर्वेदिक उपचार का विकल्प चुना।

ग्रेड-4 ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण रूपचंद को पैर में लंगड़ापन आ गया था, जिससे वे ठीक से चल-फिर पाने में असमर्थ हो चुके थे। उठने-बैठने में भी उन्हें अत्यधिक पीड़ा होती थी और दर्द से राहत पाने के लिए दिन में कई बार दर्द निवारक दवाओं का सेवन करना पड़ता था।

आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं पंचकर्म विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजा सिंगला ने बताया कि रूपचंद सितंबर 2023 में उपचार के लिए आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचे थे। एमआरआई रिपोर्ट में उनके बाएं कूल्हे में ग्रेड-4 ऑस्टियोआर्थराइटिस की पुष्टि थी। उपचार के दौरान उन्हें दो वर्षों में 6-7 बार अस्पताल में भर्ती कर पंचकर्म चिकित्सा दी गई, जिसमें कटि बस्ति, पत्र पोटली स्वेदन एवं बस्ति चिकित्सा शामिल रही। साथ ही गुग्गुल कल्प, गिलोय, रक्त चंदन और हारसिंगार से बने काढ़े तथा कच्ची हल्दी जैसी औषधियों का प्रयोग किया गया। डॉ. सिंगला ने बताया कि दो वर्षों के निरंतर आयुर्वेदिक उपचार के बाद रूपचंद अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और बिना किसी परेशानी के सामान्य रूप से चल-फिर पा रहे हैं

आयुर्वेद में रोग की जड़ पर कार्य करने की क्षमता: कुलपति

आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि ग्रेड-4 ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियों में भी आयुर्वेदिक उपचार के सकारात्मक परिणाम यह सिद्ध करते हैं कि आयुर्वेद में रोग की जड़ पर कार्य करने की क्षमता है। कुलपति ने कहा कि श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि आमजन को सुरक्षित, प्रभावी और किफायती उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

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