माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है: डॉ. श्री कुमार

-श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में सीएमई का चौथा दिन संपन्न

कुरुक्षेत्र,18 सितंबर। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के शालाक्य विभाग द्वारा आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम के चौथे दिन गुरुवार को राजकीय आयुर्वेद कॉलेज, त्रिपुनीथुरा (केरल) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्री कुमार के और कुरुक्षेत्र के तनेजा डायग्नोस्टिक एंड रेडियोलॉजी सेंटर के संचालक डॉ. अर्पित तनेजा ने व्याख्यान दिया। इस अवसर पर कुलपति प्रो.वैद्य करतार सिंह धीमान, कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष कुमार मेहता, शालाक्य तंत्र विभाग की चेयरपर्सन प्रो. आशु, प्रो. मनोज कुमार तंवर समेत प्रतिभागी मौजूद रहे।

इस अवसर पर राजकीय आयुर्वेद कॉलेज, त्रिपुनीथुरा (केरल) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्री कुमार के. ने कहा कि उच्च रक्तचाप (बीपी) और डायबिटीज से पीड़ित लोगों को समय-समय पर आंखों की जांच करानी चाहिए, क्योंकि यह बीमारियां धीरे-धीरे आंखों की रोशनी पर असर डालती हैं। उन्होंने सिरदर्द और दृष्टिगत रोगों पर विस्तार से व्याख्यान दिया और बताया कि शुरुआती लक्षणों की अनदेखी मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

नेत्र रोग में बस्ति और पंचकर्म का महत्व

डॉ. श्री कुमार ने बताया कि नेत्र रोगों के उपचार में बस्ति की विशेष भूमिका है। वहीं, माइग्रेन जैसी जटिल समस्या में पंचकर्म चिकित्सा बेहद लाभकारी है। उन्होंने कहा कि माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है। इसमें रोगियों को तेज सिरदर्द, उल्टी, रोशनी और आवाज के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि आजकल तनाव और अवसाद के कारण महिलाओं में माइग्रेन की समस्या अधिक पाई जा रही है। ऐसे रोगियों के लिए पंचकर्म की नस्य विधि प्रभावी साबित होती है और इससे लंबे समय तक राहत मिल सकती है।

 

आयुर्वेद में बेहतर उपचार

डॉ. श्री कुमार ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा में माइग्रेन को पूरी तरह खत्म करना कठिन है, लेकिन आयुर्वेद में इसका सफल उपचार मौजूद है। उन्होंने विद्यार्थियों और चिकित्सकों से अपील की कि वे मरीजों को समय रहते सही परामर्श और पंचकर्म चिकित्सा की ओर मार्गदर्शन करें।

 

सीटी स्कैन से आसान हुआ निदान

इस अवसर पर कुरुक्षेत्र के तनेजा डायग्नोस्टिक एंड रेडियोलॉजी सेंटर के संचालक डॉ. अर्पित तनेजा ने सीटी स्कैन की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नाक से जुड़ी समस्याएं जैसे नजला, एलर्जी, ट्यूमर, साइनोसाइटिस और कान से संबंधित जटिलताओं, जन्मजात विकृतियों व हड्डी के संक्रमण की पहचान में सीटी स्कैन बेहद कारगर है। उन्होंने कहा कि सीटी स्कैन न केवल रोग की सटीक पहचान करता है, बल्कि जटिल मामलों में यदि सर्जरी की आवश्यकता हो तो उसकी योजना बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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