ग्राम पंचायतों का होगा राज्यव्यापी प्रशिक्षण
नीलोखेड़ी / करनाल,11 सितंबर। “सच्चा ग्राम स्वराज तभी स्थापित हो सकता है जब ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर बनें और अपने संसाधनों से आय अर्जित करें।” यह विचार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान, नीलोखेड़ी के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने संस्थान परिसर में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किए। कार्यक्रम का आगाज़ मुख्य अतिथि, अध्यक्ष और प्रशिक्षकों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
डॉ. चौहान ने कहा कि पंचायतों को केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए नवीन उपाय तलाशने होंगे। इसके लिए उन्होंने स्थानीय करों का प्रभावी प्रबंधन, ग्राम स्तर पर उपलब्ध सामुदायिक संपत्तियों का उपयोग, ग्राम पर्यटन को बढ़ावा देने तथा नवाचार आधारित परियोजनाएँ शुरू करने जैसे विकल्प सुझाए। उन्होंने कहा कि पंचायतों की आर्थिक स्वायत्तता ही सच्चे स्वराज का आधार है।
उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक कार्यों में हिंदी का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस 14 सितम्बर को मनाया जाता है, लेकिन आवश्यकता है कि हिंदी को हर दिन, हर समय कामकाज और व्यवहार की भाषा बनाया जाए। इस अवसर पर उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों को अपने हस्ताक्षर हिंदी में करने का अभ्यास करने के लिए भी प्रेरित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय, करनाल के कुलगुरु डॉ. एस.के. मल्होत्रा ने बागवानी और कृषि क्षेत्र की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों की व्यक्तिगत आय बढ़ाने के साथ-साथ पंचायतों की आय बढ़ाने में भी इन योजनाओं का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनका विश्वविद्यालय किसानों, विशेषकर बागवानी के किसानों, के लिए अनेक नए शोध कार्यक्रम शुरू कर रहा है, जिनसे गाँवों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने पंचायतों की आय बढ़ाने के विभिन्न मॉडल, वित्तीय प्रबंधन की आधुनिक तकनीकें और समुदाय आधारित विकास योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रदेशभर से आए पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी निभाई और व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए।
डॉ. नीलम छिकारा, योजना विशेषज्ञ ने कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. एस.के. मल्होत्रा और निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान का विशेष रूप से अभिनंदन किया तथा कहा कि इनके मार्गदर्शन से यह प्रशिक्षण और भी सार्थक बनेगा। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बहुत उपयोगी हैं क्योंकि ये न केवल नई जानकारी प्रदान करते हैं बल्कि ग्राम स्तर पर कार्य करते समय आने वाली चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान भी बताते हैं।
कार्यक्रम में संस्थान के संकाय सदस्य डॉ सुशील मेहता, संदीप भारद्वाज ,शुभम भार्गव (क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण विशेषज्ञ), सिमरन (बीडीसीओ, पुंडरी), शीतल (बीडीपीओ, पानीपत), मास्टर ट्रेनर निर्मला, दीपशिखा, चंचल, मुकेश, जसविंदर, सुनीता, सतबीर यादव उपस्थित रहे।
