चंडीगढ़। पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे एवं हिसार के पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह के प्रदेशाध्यक्ष बनने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। जींद जिले की उचाना विधानसभा सीट से मात्र 32 मतों से चुनाव हारे बृजेंद्र सिंह को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के विदेश मामले विभाग (फोरन अफेयर डिपार्टमेंट) में वाइस चेयरमैन बनाया गया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद कांग्रेस के विदेश मामले विभाग के चेयरमैन होंगे। बृजेंद्र सिंह के साथ डा. आरथी कृष्णा को भी वाइस चेयरमैन बनाया गया है। डा. आरथी कृष्णा कर्नाटक में एनआरआइ फोरम की उपाध्यक्ष हैं। बृजेंद्र सिंह हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के दावेदारों में शामिल थे। कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर बृजेंद्र सिंह को जिम्मेदारी मिलने से उनकी प्रदेश अध्यक्ष की दावेदारी पर असर पड़ेगा।

हरियाणा में कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की नियुक्तियों में पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. अशोक तंवर के किसी समर्थक को जगह नहीं मिल पाई है। कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह को हरियाणा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

जातीय समीकरणों के आधार पर बृजेंद्र सिंह की दावेदारी यदि प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए उपयुक्त नहीं बैठी तो उन्हें कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी बनाने की संभावना थी। इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह तो प्रयास कर ही रहे थे, साथ ही राहुल गांधी के नजदीकी होने के नाते बृजेंद्र सिंह भी प्रदेश की राजनीति में बड़ा धमाका करने की कोशिश में थे। मगर अब उन्हें केंद्र की राजनीति में जोड़ दिया गया है।

पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की गिनती सुलझे हुए नेताओं में होती है। वह हरियाणा में आइएएस थे और वीआरएस लेकर राजनीति में आए थे। पहली बार हिसार लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद बने थे, लेकिन बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे, लेकिन कांग्रेस ने हिसार से उनका लोकसभा का टिकट काट दिया था। लोकसभा के चुनाव में टिकट कटने के बाद कांग्रेस ने जींद जिले की उचाना विधानसभा सीट से बृजेंद्र सिंह को चुनाव लड़ने का मौका दिया। तब उनके सामने हरियाणा की भाजपा सरकार में साढ़े चार साल तक साझीदार रहे जेजेपी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला थे। बृजेंद्र सिंह व दुष्यंत चौटाला दोनों चुनाव हार गए और भाजपा के देवेंद्र अत्री मात्र 32 मतों से चुनाव जीत गए थे। बृजेंद्र सिंह ने इस चुनाव को हाई कोर्ट में चुनौती दे रखी है। पिछले दिनों बृजेंद्र सिंह का एक इंटरव्यू काफी चर्चा में रहा था, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के तीन नेताओं की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि उन्हें हराने के लिए वह सक्रिय हो गए थे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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