अंबाला। प्रदेश में टैक्स चोरी और अन्य मामलों में कारोबारियों पर लगाए गए जुर्माने की अपीलों की फाइलों को ही अधिकारी दबा गए जिसके चलते भी सरकारी खजाने में फूटी कौड़ी नहीं पहुंची

आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर आडिट विभाग भी सवाल खड़े कर चुका है। कारोबारियों से अरबों रुपये आना है, लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते यह राशि अटक गई।

यहां तक कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ इस गंभीर मामले में भी जिम्मेदारी फिक्स नहीं की गई। यह भी जांच का विषय है कि किस अधिकारी के कार्यकाल में दस्तावेजों को दबाया गया जिसका सीधा लाभ कारोबारियों को हुआ।

दूसरी ओर प्रदेश में दो लाख 86 हजार से अधिक कारोबारियों पर 32 हजार करोड़ से अधिक बकाया है, जिसको लेकर भी राज्य के सभी अधिकारियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली गई और एक-एक जिले पर चर्चा की गई।

जिलों के रिकवरी के आंकड़े काफी निराश करने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि वैट का यह रुपये कई सालों पुराना है, लेकिन फाइलों में दबा रखा है। सूत्रों का कहना है कि आडिट विभाग ने भी इस बकाया को लेकर आपत्ति उठाई थी और इसको लेकर भी अधिकारियों से पत्राचार किया गया था।

इस तरह अपीलों पर नहीं हुआ गौर

राज्य के कई जिलों में सैंकड़ों कारोबारियों पर जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद कुछ ने जुर्माना जमा करा दिया तो कुछ ने वरिष्ठ अधिकारियों के ऊपर अपील कर दी।

यह अपील रेंज में की गई थी। इसके बाद कारोबारियों ने अपना पक्ष रेंज अधिकारियों के पास रखा, जिसके बाद फाइल एक बार फिर जिला स्तर पर आबकारी एवं कराधान विभाग के पास पहुंच गई।

कारोबारियों का तर्क था कि जुर्माना गलत लगाया गया है। इसके बाद रेंज से फाइल जिला स्तर पर अधिकारियों के पास आ गई। इन फाइलों का निपटारा करने के लिए समय सीमा तय हुई पड़ी है, लेकिन अपील में गई फाइल दोबारा अफसरों के पास तो पहुंच गई लेकिन उसको दबा दिया गया। सेक्शन 18 में समयावधि में इन फाइलों का निपटारा हो जाना चाहिए था।

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