करनाल 11 जुलाई।  कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि राज्य में धान की पराली जलाने की समस्या तथा पर्यावरण पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, हरियाणा राज्य (प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ,वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 31-ए के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए निर्देश जारी किए है। जारी निर्देशों के अनुसार हरियाणा राज्य  में धान की कटाई करने के इच्छुक कम्बाईन हार्वेस्टर के मालिक कम्बाईन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाएंगे तथा राज्य में किसी भी कम्पाइन हार्वेस्टर को सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के बिना धान की कटाई करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कटाई के बाद खुले खेत में धान की पराली जलाना राज्य और उससे सटे दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है और इस तरह की हरकतें मिट्टी और पर्यावरण को अपूर्णीय क्षति पहुंचा रही है।
उन्होंने बताया कि धान की कटाई प्रक्रिया के दौरान जब कम्बाईन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ा जाता है, तो धान के अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जा सकता है, जिससे किसानों को धान के अवशेषों को जलाए बिना अपनी अगली फसल बोने में सुविधा होती है। जिससे किसान आगजनी नहीं करता है और वायु प्रदूषण नहीं होता है । इसलिए धान की कटाई करने वाले कम्बाईन हार्वेस्टर के मालिक कम्बाईन हार्वेस्टर के गाव सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगवाना अनिवार्य किया जाऐगा।
उप निर्देशक डॉ. वजीर सिंह ने सभी कम्बाईन हार्वेस्टर मालिको से आग्रह किया है कि वे सभी अपनी कम्बाईन हार्वेस्टर पर सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगवा लें ताकि उनको सीजन में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंनें सभी किसानो से अपील की है कि वे फसल कटाई  के उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग न लगाऐ बल्कि इसको पशु चारे के तौर पर या खेत में ही मिलाकर उपयोग करें।

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