केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) द्वारा चंडीगढ़ में ई-ट्रांसपोर्ट परियोजना पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “ई-ट्रांस 2025” के दूसरे दिन विभिन्न राज्यों के अधिकारियों ने परिवहन क्षेत्र की नई पहलों, उपलब्धियों और सुझावों पर विचार साझा किए।
कार्यशाला में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ-साथ 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली और चंडीगढ़ शामिल हैं।
31 फेसलेस सेवाओं पर दिया गया जोर
ई-ट्रांसपोर्ट परियोजना के लिए डीडीजी और समूह प्रमुख (एचओजी) जायदीप शोम ने डिजिटल एप्लीकेशंस का अवलोकन प्रस्तुत किया। इस दौरान वाहन, सारथी, ई-चालान, पीयूसीसी और वीएलटीईए जैसे प्रमुख डिजिटल अनुप्रयोगों पर चर्चा की गई।
वाहन पंजीकरण सेवाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहन प्लेटफार्म और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और प्रबंधन के लिए वन-स्टॉप समाधान के रूप में कार्य करने वाले सारथी एप्लीकेशन की 31 फेसलेस सेवाओं पर जोर दिया गया।
मोटर वाहनों के दस्तावेजों की खुद होगी जांच
एनआइसी ओडिशा के प्रशांत कुमार नायक ने दस्तावेज सत्यापन के लिए विकसित एआइ-संचालित ई-डिटेक्शन सिस्टम का प्रदर्शन किया। यह सिस्टम टोल प्लाजा के डेटा का उपयोग करके मोटर वाहन के दस्तावेजों की स्वचालित रूप से जांच करता है।
यदि कोई दस्तावेज एक्सपायर या अमान्य पाया जाता है तो स्वचालित रूप से ई-चालान जेनरेट हो जाता है। उन्होंने लाइसेंस जांच के लिए एक अभिनव एआई आधारित स्व-प्रोक्टरिंग सिस्टम भी प्रदर्शित किया जो कदाचार को रोकने के लिए स्क्रीन को लाक करता है और अपलोड किए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि करता है।
