इस सेक्शन पर करीब दो साल पहले बादल फटने से पहाड़ी का एक हिस्सा बह गया था, जिसका असर रेलवे ट्रैक पर भी पड़ा था। जुटोग समर हिल सेक्शन बीच ट्रैक का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। अस्थायी रूप से रेलवे ने ट्रेनों का आवागमन शुरू करवा दिया था, लेकिन अब करीब दो करोड़ 95 लाख रुपये की लागत से इस हिस्से को तैयार किया जा रहा है।
इन 14 दिनों में रेलवे चाहकर भी तारा देवी से शिमला तक अन्य वाहनों की व्यवस्था नहीं कर पा रहा, क्योंकि रेलवे के नियमों में इस तरह की व्यवस्था पर स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। महज आपातकालीन स्थिति में ही रेलवे यात्रियों के लिए चौपहिया वाहनों की व्यवस्था कर सकता है।
बारिश से ढहा पहाड़ी हिस्सा, ट्रैक क्षतिग्रस्त
इस रूट पर करीब सात गाड़ियां रोजाना दौड़ती हैं। अगस्त 2023 में बादल फटने और भारी वर्षा कारण पहाड़ी का एक हिस्सा ढह जाने से विश्व धरोहर स्थल कालका-शिमला ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया। शिमला में जुटोग और समर हिल रेलवे स्टेशनों के बीच पटरी का एक बड़ा हिस्सा बह गया था। यह पहाड़ी से नीचे लटक गया था, जबकि कंडाघाट-शिमला के बीच ट्रेनों की आवाजाही रद कर दी गई थी।
