एक वर्ष शेष  है कार्यकाल, समयपूर्व भंग कर ताज़ा चुनाव सरल नहीं  हेमंत
चंडीगढ़  –  मौजूदा अम्बाला नगर निगम के गठन को  चार वर्ष पूरे हो गए हैं.   14 जनवरी 2021 को अम्बाला मंडल की तत्कालीन कमिश्नर दीप्ति उमाशंकर द्वारा अम्बाला नगर  निगम की पहली प्रत्यक्ष अर्थात सीधी निर्वाचित मेयर शक्ति रानी शर्मा और निगम क्षेत्र के  सभी 20 वार्डों  से निर्वाचित नगर  निगम सदस्यों ( जिन्हें आम तौर पर पार्षद या काउंसलर- एम.सी. कहा जाता है हालांकि हरियाणा नगर निगम कानून में पार्षद शब्द नहीं है) को पद और निष्ठा की शपथ दिलाई गई थी एवं उसी  दिन से वर्तमान  नगर निगम का पांच वर्ष का  कार्यकाल प्रारंभ हो गया था. सनद रहे कि तीन महीने अक्टूबर, 2024 में  मेयर शक्ति रानी  के पंचकूला जिले की कालका विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक  निर्वाचित हो जाने फलस्वरूप  तब से अम्बाला नगर निगम मेयर   का पद रिक्त है.

शहर  निवासी  पंजाब एवं हरियाणा  हाईकोर्ट एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून  के  जानकार   हेमंत कुमार ( 9416887788)  ने बताया कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994
की धारा 5 अनुसार किसी भी नगर निगम  का कार्यकाल उसके आम चुनाव सम्पन्न होने बाद  मंडल आयुक्त द्वारा नवनिर्वाचित सदन  की बुलाई गई पहली बैठक से पांच वर्ष तक होता है एवं  चूँकि नवनिर्वाचित मेयर और नगर निगम सदस्यों का  शपथ ग्रहण ही  नगर निगम सदन की पहली बैठक होती है, अत: मौजूदा अम्बाला नगर निगम का कार्यकाल अगले वर्ष  13  जनवरी 2026   तक  शेष है.

यह पूछे जाने पर कि अगर हरियाणा सरकार समयपूर्व अम्बाला नगर निगम को भंग कर देती है तो  उस स्थिति में  क्या इसी  वर्ष 2025 में प्रदेश के अन्य  नगर निगमों के साथ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अम्बाला नगर निगम के भी  ताज़ा आम चुनाव  कराये जा सकते है, इस पर हेमंत ने बताया कि निस्संदेह हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 400 में प्रदेश सरकार के पास नगर निगम को भंग करने का कानूनी अधिकार हैं हालांकि ऐसी शक्ति का प्रयोग करने के लिए सरकार के पास ठोस आधार होना चाहिए जैसे कि अमुक नगर निगम संवैधानिक और वैधानिक तौर से  सही ढंग से  कार्य नहीं कर रही है अथवा  वह कानून के अंतर्गत अपने कर्तव्यों का सही प्रकार से पालन नहीं कर रही है अथवा अपनी वैधानिक  शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है, तो प्रदेश सरकार समुचित कारणों के साथ प्रदेश के शासकीय गजट में एक नोटिफिकेशन मार्फ़त सम्बंधित नगर निगम को समयपूर्व भंग कर सकती है हालांकि ऐसा करने से पूर्व प्रदेश सरकार द्वारा उस नगर निगम (सदन) को सुनवाई का एक अवसर देना आवश्यक होगा कि क्यों फलां-फलां कारणों से क्यों न उसे समयपूर्व भंग कर दिया जाए. इसके बाद भी  प्रदेश सरकार द्वारा नगर निगम को भंग करने के निर्णय को अदालत में चुनौती दी जा सकती है.

हेमंत ने इस सम्बन्ध में वर्ष 2002 में तत्कालीन ओम प्रकाश चौटाला सरकार  द्वारा तब  फरीदाबाद नगर निगम, जिसके आम चुनाव वर्ष 2000 में हुए थे, को समय पूर्व भंग करने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गयी थी जिसके बाद कोर्ट ने फरीदाबाद नगर निगम  भंग करने के प्रदेश सरकार के  आदेश को स्टे कर दिया था. बहरहाल, इसके बाद वर्ष 2005 में भूपेन्द्र हुड्डा सरकार के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनने के बाद ही फरीदाबाद नगर निगम के अगले  आम चुनाव कराये गये थे.

अगर अम्बाला नगर निगम को  प्रदेश  की मौजूदा नायब सैनी सरकार सरकार द्वारा समय पूर्व  भंग कर  किया जाता है, तो उसे भी न केवल प्रमुख  विपक्षी पार्टी कांग्रेस  द्वारा  बल्कि अम्बाला नगर निगम के  निवासी किसी भी  आम आदमी द्वारा  हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर  चुनौती दी जा सकती है.

हेमंत ने  बताया कि यह सत्य है कि गत माह   2 दिसम्बर 2024 को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा  एक नोटिफिकेशन मार्फ़त   शक्ति रानी शर्मा का नाम  अम्बाला  नगर निगम के मेयर पद से  बीती 8 अक्टूबर की तारीख से ही   डी-नोटिफाई कर दिया गया परन्तु  चूँकि  हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की मौजूदा  धारा 13 अनुसार  अगर  नगर निगम के मेयर का पद, बेशक वह  किसी भी कारण से रिक्त हुआ हो, तो उसे राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा  उपचुनाव द्वारा भरा नहीं जा सकता है, इसलिए बिना उपरोक्त कानूनी धारा में  संशोधन किये  अम्बाला नगर निगम के मौजूदा रिक्त  मेयर पद  को शेष अवधि के लिए  भरना  संभव नहीं है.

By Dr. Rajesh Wadhwa

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