जनवरी,2026 के दूसरे सप्ताह तक है वर्तमान नगर निगम का कार्यकाल 
 
चंडीगढ़  — सोमवार 9 दिसम्बर   हरियाणा राज्य  निर्वाचन आयोग द्वारा अम्बाला  सहित प्रदेश की  5 नगर निगमों जिनमें  फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत  और मानेसर नगर निगमें  भी शामिल हैं  के समस्त निगम क्षेत्र की   मतदाता सूचियों को अपडेट करने का विस्तृत एवं संशोधित  कार्यक्रम  जारी किया गया  जो 10 दिसम्बर 2024 से प्रारंभ होकर आगामी  6 जनवरी 2025 तक सम्पन्न होगा.
इसी बीच   पंजाब एवं हरियाणा   हाईकोर्ट में  एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून  के  जानकार   हेमंत कुमार ( 9416887788)  ने बताया कि मौजूदा अम्बाला  नगर निगम का कार्यकाल फ़िलहाल अगले  13 महीने अर्थात   जनवरी, 2026 के दूसरे सप्ताह   तक  शेष हैं एवं इस  कारण राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अगले वर्ष 2025 में  प्रदेश की बाकी नगर निगमों के साथ अम्बाला   नगर निगम के आम चुनाव  नहीं कराये जा सकते हैं.
यह पूछे जाने पर कि अगर हरियाणा सरकार समयपूर्व अम्बाला नगर निगम को भंग कर देती है तो क्या उस स्थिति में भी क्या एक वर्ष पूर्व ताज़ा आम चुनाव नहीं कराये जा सकते है, इस पर हेमंत ने बताया कि यकीनन हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 400 में प्रदेश सरकार के पास नगर निगम को भंग करने का कानूनी अधिकार हैं हालांकि ऐसी शक्ति का प्रयोग करने के लिए सरकार के पास ठोस आधार होना चाहिए जैसे कि अमुक नगर निगम संवैधानिक और वैधानिक तौर से  सही ढंग से  कार्य नहीं कर रही है अथवा  वह कानून के अंतर्गत अपने कर्तव्यों का सही प्रकार से पालन नहीं कर रही है अथवा अपनी वैधानिक  शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है, तो प्रदेश सरकार समुचित कारणों के साथ प्रदेश के शासकीय गजट में एक नोटिफिकेशन मार्फ़त सम्बंधित नगर निगम को समयपूर्व भंग कर सकती है हालांकि ऐसा करने से पूर्व प्रदेश सरकार द्वारा उस नगर निगम (सदन) को सुनवाई का एक अवसर देना आवश्यक होगा कि क्यों फलां-फलां कारणों से क्यों न उसे समयपूर्व भंग कर दिया जाए. इसके बाद भी  प्रदेश सरकार द्वारा नगर निगम को भंग करने के निर्णय को अदालत में चुनौती दी जा सकती है.
हेमंत ने इस सम्बन्ध में वर्ष 2002 में तत्कालीन ओम प्रकाश चौटाला सरकार  द्वारा तब  फरीदाबाद नगर निगम, जिसके आम चुनाव वर्ष 2000 में हुए थे, को समय पूर्व भंग करने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गयी थी जिसके बाद कोर्ट ने फरीदाबाद नगर निगम  भंग करने के प्रदेश सरकार के  आदेश को स्टे कर दिया था. बहरहाल, इसके बाद वर्ष 2005 में भूपेन्द्र हुड्डा सरकार के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनने के बाद ही फरीदाबाद नगर निगम के अगले  आम चुनाव कराये गये थे.
 अगर अम्बाला नगर निगम को  प्रदेश  की मौजूदा नायब सैनी सरकार सरकार द्वारा समयपूर्व  भंग कर  किया जाता है, तो उसे भी न केवल विपक्षी अर्थात कांग्रेस पार्टी के  नगर निगम सदस्य  ( जिन्हें आम भाषा में पार्षद कहते हैं हालांकि  कानून में पार्षद शब्द नहीं है )
बल्कि अम्बाला नगर निगम का निवासी कोई आम आदमीं भी हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर  चुनौती दे सकता है.
हेमंत ने आगे  बताया कि यह सत्य है कि  दो माह पूर्व   8 अक्टूबर 2024 को अम्बाला नगर निगम की तत्कालीन मेयर शक्ति रानी शर्मा, जो चार वर्ष पूर्व दिसम्बर 2020 में नगर निगम की  प्रत्यक्ष अर्थात सीधी  मेयर निर्वाचित हुई थीं, पंचकूला जिले की कालका विधानसभा सीट से भाजपा विधायक बन गई हैं एवं   हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 8 ए‌ अनुसार वह  विधायक  निर्वाचित घोषित होने की तारीख से अम्बाला  नगर निगम की मेयर नहीं रहीं. इसी माह  2 दिसम्बर को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा  एक नोटिफिकेशन जारी कर  शक्ति रानी शर्मा का  अम्बाला  नगर निगम के मेयर पद से नाम बीती 8 अक्टूबर की तारीख से ही   डी-नोटिफाई कर दिया गया है.
बहरहाल,  हेमंत का कहना है कि चूँकि  हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 13 अनुसार  अगर किसी नगर निगम के मेयर का पद, बेशक वह  किसी भी कारण से रिक्त हुआ हो, तो उसे राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा  उपचुनाव द्वारा भरा नहीं जा सकता है, इसलिए बिना उपरोक्त कानूनी धारा में हरियाणा विधानसभा द्वारा   उपयुक्त कानूनी संशोधन किये  अम्बाला नगर निगम के मौजूदा रिक्त  मेयर के लिए  उपचुनाव कराना भी  संभव नहीं है.

By Dr. Rajesh Wadhwa

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