कुरुक्षेत्र 18 अगस्त ढंगाली स्थित सिकरी फार्म में कृषि विज्ञान एवं अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिकों, पीएचडी व एमएससी के छात्र-छात्राओं तथा किसानों ने भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने फार्म में अपनाई जा रही आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का बारीकी से अवलोकन किया और खेती में नवीन तकनीकों के प्रयोग की जानकारी प्राप्त की। भ्रमण में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार मीणा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल के विषय विशेषज्ञ डॉ. हरदेव राम व अश्विनी कुमार प्रमुख रूप से शामिल रहे।
वैज्ञानिकों ने छात्रों एवं किसानों के साथ कृषि की आधुनिक तकनीकों, फसल प्रबंधन, जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान वैज्ञानिकों ने सिकरी फार्म में वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद, मिट्टी की उर्वरता, फसल प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि खेती में जैविक खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट का उचित प्रयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने के साथ कृषि लागत को कम किया जा सकता है। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन और आमदनी प्राप्त करने में भी मदद मिल सकती है। पीएचडी और एमएससी के छात्र-छात्राओं ने फार्म की विभिन्न गतिविधियों में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से खेती की आधुनिक तकनीकों, फसल उत्पादन, मिट्टी प्रबंधन तथा वर्मी कम्पोस्ट से संबंधित जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने खेत स्तर पर कृषि तकनीकों के व्यावहारिक प्रयोग को नजदीक से समझा। किसानों ने भी वैज्ञानिकों से खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और आधुनिक कृषि पद्धतियों को लेकर चर्चा की। वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने, मिट्टी की सेहत पर ध्यान देने तथा संतुलित खाद प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
सिकरी फार्म के संस्थापक करण सिकरी ने कृषि वैज्ञानिकों, छात्र-छात्राओं और किसानों के भ्रमण की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच इस प्रकार का संवाद खेती में नई तकनीकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण है। सिकरी फार्म का उद्देश्य किसानों और युवा विद्यार्थियों को आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों से जोड़ना है। सिकरी फार्म प्रबंधन की ओर से कृषि वैज्ञानिकों, छात्र-छात्राओं और किसानों का स्वागत किया गया। वैज्ञानिकों ने फार्म में अपनाई जा रही कृषि गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के भ्रमण विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देने के साथ किसानों तक नई कृषि तकनीकों को पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भ्रमण के दौरान स्वच्छता कार्य योजना के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित गतिविधियों की भी जानकारी ली गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य वर्मी कम्पोस्ट के माध्यम से लाभकारी खेती, उपयुक्त फसलों एवं बेहतर कृषि पद्धतियों के प्रति किसानों को जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों और विद्यार्थियों को कम लागत में बेहतर उत्पादन तथा टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
