कुरुक्षेत्र, 12 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में जवाहर लाल नेहरू पुस्तकालय में बुधवार को भारतीय पुस्तकालय के जनक पद्म डॉ. एस. आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती मनाई गई । इस अवसर पर पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ चेतन शर्मा एवं अन्य पुस्तकालय कर्मचारियों ने इस महान विभूति पर पुष्पांजलि अर्पित किए ।
डॉ चेतन शर्मा ने डॉ. एस. आर. रंगनाथन के जीवन एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. रंगनाथन के विचारों और सिद्धांतों ने भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर पुस्तकालय व्यवस्था को नई दिशा प्रदान की। पुस्तकालयों को ज्ञान, शिक्षा और समाज के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। डॉ. रंगनाथन का जन्म 12 अगस्त 1892 को तमिलनाडु के तंजावूर के सियाली गांव में हुआ था । उन्होंने अपना व्यावसायिक जीवन गणितज्ञ के रूप में शुरू किया तथा कला स्नातक और गणित विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री मद्रास क्रिस्चयन कॉलेज से हासिल की । डॉ एस आर रंगनाथन ने अपने जीवन में पुस्तकालय विज्ञान विषय पर 2000 से ज्यादा शोध-पत्र एवं 60 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया। उन्होंने पुस्तकालय विज्ञान को भारत में एक सम्पूर्ण विषय के तौर पर स्थापित किया । इनके द्वारा मुख्य तौर पर लिखित पुस्तकेंः पुस्तकालय विज्ञान के पांच सिद्धांत (1931), कोलन क्लासिफिकेशन सिस्टम (द्विबिन्दु वर्गीकरण प्रणाली) (1933) तथा पुस्तकालय वर्गीकरण की प्रस्तावना (1937) प्रकाशित हुई ।
डॉ चेतन शर्मा ने बताया कि भारत सरकार द्वारा डॉ एस आर रंगनाथन को पुस्तकालय विज्ञान में बहुमूल्य योगदान के लिए पद्मश्री पदक से सुशोभित किया । भारत में प्रत्येक वर्ष डॉ एस आर रंगानाथन का जन्मदिन पुस्तकालय दिवस के रूप में मनाया जाता है ।
