कुरुक्षेत्र, 31 जुलाई। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने शहीद उधम सिंह जी के शहीदी दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में उनका बलिदान राष्ट्रभक्ति, साहस और आत्मबलिदान का अप्रतिम उदाहरण है। उधम सिंह जी ने भारत माता की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। जंग-ए-आजादी के इतिहास में आज भी उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। आज का दिन हमें प्रेरणा देता है कि हम भी उनके आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा शहीद उद्यम सिंह चौक पर शहीद उद्यम सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने उपरांत अपने विचार प्रकट कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्र नायक शहीद उधम सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शहीद उधम सिंह जी ने असत्य, अन्याय और शोषण के विरुद्ध संघर्ष करते हुए आज के ही दिन वर्ष 1940 में शहादत पाई। उनकी कुर्बानी ने आजादी के लिए देशवासियों में एक नई जागृति पैदा की। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि उधम सिंह, सरदार भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद तथा मदन लाल ढींगड़ा जैसे अनेक देशभक्तों ने भारत माँ की गुलामी की जंजीरों को तोडऩे के लिए कांटों भरा रास्ता चुना और उस पर चलकर कुर्बानियां देने का इतिहास रचा।
उन्होंने कहा कि जब उधम सिंह जी केवल 20 वर्ष के थे, तो 13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग की हृदय विदारक घटना ने उनके दिल और दिमाग पर गहरा आघात किया। उस जलसे में उधम सिंह वहां इक_े हुए लोगों की पानी पिलाकर सेवा कर रहे थे। उस नरसंहार को देखकर वे स्तब्ध रह गये और उसी क्षण उधम सिंह ने जलियांवाला बाग की शहीदी मिट्टी को अपने माथे पर लगाकर यह प्रण किया कि वह इस कत्लेआम का बदला जरूर लेंगे। इस महान सपूत ने अपनी मातृभूमि के अपमान और निर्दोष लोगों के खून का बदला लेने के लिए उस साम्राज्यवादी ताकत से उसी की भूमि पर टक्कर ली, जिसके साम्राज्य में सूर्य कभी अस्त नहीं होता था। उन्होंने देशवासियों के समक्ष राष्ट्र-भक्ति, त्याग और बलिदान की एक अनूठी मिसाल कायम की, जो आने वाली पीढिय़ों को प्रेरणा देती रहेगी।
उन्होंने कहा कि शहीद उधम सिंह ने 13 मार्च, 1940 को लंदन के कैस्टन हाल में माइकल ओ. डायर को गोली मार कर उस खूनी कांड का बदला लिया था, 5 जून, 1940 को केन्द्रीय आपराधिक अदालत ओल्ड वेली में उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई और 31 जुलाई, 1940 को लंदन में पेंटोनविल जेल में उधम सिंह को फांसी दे दी गई। उन्होंने कहा कि अमर शहीद उधम सिंह जी की तरह अनेक वीरों ने आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किये थे। देश से अंग्रेजी शासन को खत्म करना और देश के हर नागरिक का कल्याण व उत्थान उनका सपना था। इस मौके पर डीआरओ चेतना चौधरी सहित अन्य अधिकारी व समाज के अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
