कुरुक्षेत्र, 31 जुलाई 2026:
देशभर में प्राकृतिक खेती की अलख जगाने वाले गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी के प्रयासों के सुखद परिणाम अब धरातल पर प्रत्यक्ष रूप से दिखने लगे हैं। उनके मार्गदर्शन में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाए गए ‘प्राकृतिक खेती अभियान’ से जुड़कर आज देश के विभिन्न राज्यों के किसान रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक कृषि को अपना रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुकुल कुरुक्षेत्र स्थित प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र में देश के अलग-अलग प्रांतों से किसानों का कुरुक्षेत्र पहुंचना लगातार जारी है।
हाल ही में राजस्थान के कोटपुतली जिले से कृषि अधिकारी मुनीष यादव एवं जगराम सिंह के नेतृत्व में 26 किसानों का दल तथा उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले से कृषि अधिकारी कमल पंत एवं डॉ. जितेन्द्र भास्कर की अगुवाई में 40 किसानों का दल गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुँचा। 27 से 29 जुलाई तक आयोजित 3-दिवसीय प्रशिक्षण सत्र के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती के गुर सीखे। इस प्रशिक्षण में सब्जी उगाने वाली महिला किसानों (कृषि सखियों) की भी विशेष भागीदारी रही, जो अपने-अपने क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती की ब्रांड एंबेसडर बनकर इसका प्रसार करेंगी।
प्राकृतिक कृषि फार्म देख हैरान रह गए किसान
ट्रेनिंग के दौरान किसानों ने गुरुकुल के 200 एकड़ में फैले विशाल प्राकृतिक कृषि फार्म का भ्रमण किया। वहां प्राकृतिक विधि से तैयार धान, ड्रैगन फ्रूट और हरी सब्जियों की लहलहाती फसलें देखकर किसानों ने अत्यंत आश्चर्य और खुशी व्यक्त की।
बिना रसायन के भी बेहतर उत्पादन संभव: पद्मश्री डॉ. हरिओम
प्रशिक्षण के दौरान प्राकृतिक खेती के स्टेट एडवाइजर पद्मश्री डॉ. हरिओम ने किसानों के समक्ष प्राकृतिक खेती का वैज्ञानिक पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने सचेत करते हुए कहा, “प्राकृतिक खेती आने वाले समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि हमने समय रहते रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का प्रयोग बंद नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियों को न तो पीने योग्य पानी मिलेगा, न उपजाऊ जमीन और न ही शुद्ध पर्यावरण।”
गौ-संवर्धन और किसान की आय बढ़ाने में कारगर
गुरुकुल के व्यवस्थापक श्री रामनिवास आर्य ने आचार्यश्री देवव्रत जी का संदेश साझा करते हुए किसानों से प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से जहाँ देशी गायों का संरक्षण होता है, वहीं खेत के मित्र कीट भी सुरक्षित रहते हैं। इसमें लागत शून्य के बराबर आती है, उत्पादन में कोई कमी नहीं होती और बाजार में उत्पाद के दाम भी दोगुने मिलते हैं।
तीन दिवसीय सफल प्रशिक्षण के उपरांत सभी प्रतिभागी किसानों को प्रमाण-पत्र वितरित कर विदा किया गया। इस अवसर पर कृषि अधिकारी डॉ. शिवेन्दु, डॉ. गगनदीप सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
