कुरुक्षेत्र, 24 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (यूजीसी-एमएमटीटीसी) एवं पर्यावरण अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यूजीसी प्रायोजित दो सप्ताह के बहुविषयक रिफ्रेशर कोर्स ‘पर्यावरणीय चुनौतियां एवं सतत विकास की दिशा में कार्य’ के तीसरे दिन चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. किरण बाला ने कहा कि पारंपरिक प्लास्टिक से बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए जैव-अवक्रमणीय बायोप्लास्टिक एक प्रभावी विकल्प है। उन्होंने बताया कि सूक्ष्मजीवी जैव-प्रौद्योगिकी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रो. रचना भटेरीया ने अपशिष्ट जल शोधन में नैनो प्रौद्योगिकी की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक नैनो-सामग्रियां जल उपचार की गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाने में सहायक हैं। उन्होंने इस क्षेत्र की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। तृतीय तकनीकी सत्र में प्रो. मोना शर्मा ने कहा कि पर्यावरणीय सततता सुनिश्चित करने के लिए सभी विषयों और समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। चतुर्थ तकनीकी सत्र में प्रो. सी. आर. डरोलिया ने तनाव प्रबंधन पर व्याख्यान देते हुए मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच, कार्य-जीवन संतुलन तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि तनाव पर प्रभावी नियंत्रण व्यक्ति की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता दोनों को बेहतर बनाता है।
कार्यक्रम के अंत में पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. पूजा ने सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन व्याख्यानों से प्रतिभागियों को पर्यावरणीय उत्तरदायित्व, सतत प्रौद्योगिकी और व्यक्तिगत कल्याण के विविध आयामों की गहन जानकारी प्राप्त हुई। सह-समन्वयक डॉ. भावना दहिया ने प्रतिभागियों को आगामी तकनीकी सत्रों की रूपरेखा से अवगत कराया।
