कुरुक्षेत्र, 24 जुलाई। प्रेरणा संस्था के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध उद्योगपति जय भगवान सिंगला ने शुक्रवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूनिवर्सिटी सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें सकारात्मक सोच, परोपकार, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में सदैव अच्छे संस्कार अपनाने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
जय भगवान सिंगला ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर असीम संभावनाएँ और प्रतिभा छिपी होती हैं। आवश्यकता केवल उसे पहचानने और निरंतर परिश्रम करने की है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका साहसपूर्वक सामना करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि परीक्षा में कम अंक आ जाना किसी भी विद्यार्थी की योग्यता का मापदंड नहीं होता। सफलता केवल अंकों से नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है। इसलिए विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने, पर्यावरण की रक्षा करने, जल एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने तथा स्वच्छ और हरित वातावरण के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने परोपकार की भावना विकसित करने, जरूरतमंद एवं असहाय लोगों की सेवा करने तथा समाज कल्याण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दूसरों के जीवन में खुशियाँ बाँटने और मानवता की सेवा करने से ही जीवन सार्थक बनता है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सुखविंद्र सिंह ने जय भगवान सिंगला का विद्यालय परिवार की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि उनके प्रेरणादायी विचार विद्यार्थियों को जीवन में सही दिशा प्रदान करेंगे। उन्होंने मुख्य अतिथि का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तित्व का सान्निध्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सेवा-भाव और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करता है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने मुख्य अतिथि के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना तथा उनके बताए आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। स्कूल की शिक्षिका श्रीमती अंचला भारद्वाज ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर स्कूल के सभी शिक्षक उपस्थित थे।
