कुरुक्षेत्र, 22 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र (यूजीसी-एमएमटीटीसी) एवं पर्यावरण अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यूजीसी प्रायोजित दो-सप्ताहीय बहु विषयक रिफ्रेशर कोर्स “पर्यावरणीय चुनौतियाँ एवं सततता पर क्रियान्वयन” का शुभारंभ मंगलवार को ऑनलाइन माध्यम से हुआ। कार्यक्रम में देश के 21 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 200 शिक्षकों ने सहभागिता की।
पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग जैसी चुनौतियों के समाधान के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि विभिन्न विषयों से जुड़े शिक्षकों की भागीदारी इस पाठ्यक्रम को अधिक प्रभावी एवं उपयोगी बनाएगी।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुआ। कोर्स समन्वयक डॉ. पूजा अरोड़ा एवं सह-समन्वयक डॉ. भावना दहिया ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों तथा देशभर से जुड़े प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए पाठ्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को आगामी शैक्षणिक गतिविधियों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी जानकारी दी।
यूजीसी-एमएमटीटीसी की निदेशिका प्रो. प्रीति जैन ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में पर्यावरणीय मुद्दों की समझ और सतत विकास के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), कुरुक्षेत्र के प्रो. बलदेव सेतिया ने “जल संसाधन अभियांत्रिकी” विषय पर व्याख्यान देते हुए जल संरक्षण, जल प्रबंधन तथा सतत विकास में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है।
दूसरे तकनीकी सत्र में स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, भोपाल के प्रो. निखिल रंजन ने जलवायु शासन, विकास नियोजन तथा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार रखे। तीसरे सत्र में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, देहरादून के प्रो. वी.पी. उनियाल ने जैव संकेतकों की भूमिका तथा जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण में उनके महत्व को रेखांकित किया।
अंतिम तकनीकी सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. भगवान सिंह चौधरी ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में हुए परिवर्तनकारी विकास, रिमोट सेंसिंग तकनीक तथा पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के योगदान पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का समापन यूजीसी-एमएमटीटीसी के उपनिदेशक डॉ. नीरज बातिश के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने सभी व्याख्यानों को ज्ञानवर्धक, समसामयिक एवं शोधपरक बताते हुए कार्यक्रम की सराहना की।
