कुरुक्षेत्र, 16 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) द्वारा यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के सहयोग से आयोजित चार-सप्ताहीय संकाय अभिमुखीकरण कार्यक्रम के बारहवें दिवस पर चार शैक्षणिक सत्रों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, शैक्षणिक नेतृत्व, शोध नैतिकता तथा एनईपी-2020 आधारित पाठ्यक्रम निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
प्रथम सत्र में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के डॉ. विवेक कुमार ने “सत्य की वास्तुकलाः ज्ञान मीमांसा, कर्तव्य एवं शैक्षणिक एकीकरण” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के लिए कार्यों में विश्वसनीयता, नैतिकता तथा पेशेवर दायित्वों का समावेश आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों के अभाव में संस्थानों और शोध कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
द्वितीय सत्र में विभिन्न प्रतिभागियों ने शिक्षा में तकनीक, कंप्यूटर नैतिकता, वैश्विक तापवृद्धि, स्वास्थ्य शिक्षा, भारतीय संविधान तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों का मूल्यांकन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार मित्तल ने किया तथा प्रतिभागियों को आवश्यक सुझाव प्रदान किए।
तृतीय सत्र में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए), नई दिल्ली के पवन कुमार तनेजा ने “शैक्षणिक नेतृत्व” विषय पर व्याख्यान देते हुए बहुविषयक शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में अध्यापकों की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों को प्रेरित करने वाला मार्गदर्शक बनना होगा।
चतुर्थ सत्र में चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी की प्रो. सुनीता भरतवाल ने एनईपी-2020 के अंतर्गत परिणाम-आधारित शिक्षा एवं विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली (सीबीसीएस) पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि ब्लूम्स टैक्सोनॉमी के अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण और अधिगम परिणामों का आकलन शिक्षा को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाता है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राहुल शर्मा ने किया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समन्वयक प्रो. अनिल के. मित्तल और सह-समन्वयक डॉ. भंवर सिंह का विशेष योगदान रहा।
