अंबाला। बलदेव नगर स्थित बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता (एसई) कार्यालय में मंगलवार को लगी बिजली अदालत में भले ही केवल चार शिकायतें पहुंचीं, लेकिन इनमें से तीन मामलों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। हालात ऐसे बने कि कई मामलों में एसई वीके गोयल को मौके पर ही अधिकारियों को फटकार लगानी पड़ी और उपभोक्ताओं की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश देने पड़े।

सबसे पहले मंडौर निवासी किसान करनैल सिंह अपनी समस्या लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके खेतों की बिजली आपूर्ति जड़ौत एपी फीडर से होती है। यह फीडर बरनाला पावर हाउस से संचालित होता है, जो बब्याल सब डिवीजन के अंतर्गत आता है। वहीं इस फीडर के छह ट्रांसफार्मर मॉडल टाउन सब डिवीजन के अधीन हैं। इस दोहरी व्यवस्था के कारण किसान बीच में फंस गए हैं।

सुनवाई के दौरान मॉडल टॉउन एसडीओ ने बताया कि जब बब्याल सब डिवीजन अपने क्षेत्र में कोई काम करता है तो जीओ स्विच बंद कर देता है, लेकिन इसकी सूचना उन्हें नहीं दी जाती।

इससे उनके क्षेत्र में बिजली बाधित हो जाती है और जानकारी तब मिलती है जब उपभोक्ता शिकायत करता है। इस पर एसई वीके गोयल भड़क गए। उन्होंने कहा, इतना रोला तो हिंदुस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर नहीं है जितना तुमने सब डिवीजन लेवल पर कर दिया है।

उन्होंने दोनों एसडीओ को फटकार लगाते हुए कहा कि विभागीय तालमेल की कमी का खामियाजा किसानों को नहीं भुगतना चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि साझा फीडरों की समस्या जल्द हल नहीं हुई तो चार्जशीट जारी की जाएगी। उन्होंने जड़ौत एपी फीडर को सद्दोपुर पावर हाउस से जोड़ने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए।

क्या मुझे हर चौथे दिन यूं ही धक्के खाने पड़ेंगे एसई सर….

दूसरी शिकायत साहा स्थित एचएसआइआइडीसी क्षेत्र से आए राजीव जैन की थी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2025 में उनके एमडीआइ बिल में गलत पंचिंग कर दी गई थी, जिसके कारण करीब 28 हजार रुपये अतिरिक्त बिल बन रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कर्मचारी ने गलती की, वह स्वयं इसे स्वीकार कर चुका है, लेकिन आठ महीने बाद भी सुधार नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि दो जून को उपभोक्ता कष्ट निवारण फोरम और नौ जून को एसई कार्यालय में शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। राजीव जैन ने एक अन्य समस्या भी रखी। उन्होंने बताया कि अंबाला पैकेजिंग के नाम से उनका छह किलोवाट का दूसरा कनेक्शन था, जिसे बिजली निगम चार महीने तक रिकॉर्ड में ही दर्ज नहीं कर पाया।

इस दौरान औसत बिल भेजे जाते रहे। बाद में मीटर रिकॉर्ड में चढ़ाने के बाद चार महीने का पूरा भार एक साथ डाल दिया गया। इस पर एसई ने मुलाना एक्सईएन को फोन कर मामले की जांच, जिम्मेदारी तय करने और उपभोक्ता का बिल सही करने के निर्देश दिए। राजीव ने यह भी आरोप लगाया कि केसरी सब डिवीजन क्षेत्र में ऐसे कई उपभोक्ता हैं जिन्हें बिना रीडिंग के बिल भेजे जा रहे हैं।

चार लाख रुपये भेज दिया बिजली का बिल…

तीसरी शिकायत केसरी सब डिवीजन के तहत आने वाले रामपुर निवासी राजेश कुमार की थी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर में उनका मीटर बदला गया था, लेकिन नई रीडिंग शून्य से शुरू करने के बजाय 65 हजार यूनिट से शुरू कर दी गई।

इसके चलते उनके घर का बिल बढ़ते-बढ़ते करीब चार लाख रुपये तक पहुंच गया। राजेश ने कहा कि घर में केवल दो सदस्य रहते हैं और एसी तक नहीं है, फिर भी उन्हें भारी भरकम बिल थमा दिया गया। एसई ने इस मामले में भी तत्काल जांच कर बिल संशोधित करने के निर्देश दिए।

मीटर कटा तो भरे 25 हजार

चौथी शिकायत तिरखा कालोनी जलबेड़ा निवासी जसबीर सिंह की थी। उन्होंने बताया कि उनका मीटर विभाग द्वारा उतार लिया गया, जबकि वह 25 हजार रुपये जमा भी करवा चुके हैं। जांच में सामने आया कि वर्ष 2014 से 2025 तक मिनिमस बेस पर बिल भेज जाते रहे। बाद में अचानक चार लाख रुपये का बकाया दिखा दिया गया।

सुनवाई के दौरान एक्सईएन ने माना कि इसमें विभाग की गलती है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ता को भी समय-समय पर बिल की जानकारी लेनी चाहिए थी। जब मीटर कटने लगा तो 25 हजार रुपये भरे।

मेरे खेतों की बिजली दो सब डिवीजनों के बीच फंसी हुई है। जब सिंचाई की बारी आती है तो लाइन बंद मिलती है। महीनों से चक्कर काट रहा हूं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। -करनैल सिंह, किसान, मंडौर

एचएसआइआइडीसी साहा उद्योगपति राजीव जैन ने कहा कि  आठ महीने से गलत बिल ठीक करवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहा हूं। गलती विभाग मान रहा है, फिर भी सुधार नहीं हो रहा। आखिर उपभोक्ता अपनी समस्या लेकर कहां जाए?

मीटर बदलने के बाद रीडिंग शून्य से शुरू होनी चाहिए थी, लेकिन 65 हजार यूनिट से शुरू कर दी गई। दो कमरों के घर का चार लाख रुपये बिल देखकर मैं हैरान हूं। -राजेश कुमार, निवासी रामपुर

जलबेड़ा के तिरखा कॉलोनी के जसबीर सिंह ने कहा कि  अचानक 4 लाख रुपये का बिल भेजा गया है। 25 हजार रुपये भी भर दिए लेकिन फिर भी मेरा मीटर काट दिया है। मेरा मीटर लगवा दें, जितना भी सही बिल होगा भर दूंगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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