कुरुक्षेत्र, 8 जून 2026:
ऐतिहासिक और पावन धरा कुरुक्षेत्र के गुरुकुल परिसर में आज ‘सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल’ के राष्ट्रीय शिविर का अत्यंत भव्य और दिव्य शुभारम्भ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और पावन हवन-यज्ञ की आहुतियों के साथ शुरू हुए इस शिविर में भारत की नारी शक्ति का एक अद्भूत रूप देखने को मिल रहा है। इस राष्ट्रीय शिविर में देश के लगभग 20 राज्यों से आईं 500 से अधिक युवतियां (वीरांगनाएं) अपने जीवन निर्माण, आत्मरक्षा और राष्ट्र-सेवा का कड़ा प्रशिक्षण ले रही हैं।
वैदिक यज्ञ से हुआ विश्व कल्याण का संकल्प
शिविर के उद्घाटन सत्र में सार्वदेशिक आर्यवीर दल न्यास के अध्यक्ष स्वामी देवव्रत सरस्वती जी एवं सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल की प्रधान संचालिका श्रीमती व्रतिका आर्या मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत देवयज्ञ (हवन) से हुई, जहाँ सभी आर्य वीरांगनाओं ने एक स्वर में वैदिक ऋचाओं का पाठ करते हुए यज्ञ-कुण्ड में साकल्य सामग्री से आहुतियां डालीं और संपूर्ण विश्व के कल्याण व शांति की कामना की।
प्रधान संचालिका श्रीमती व्रतिका आर्या का ओजस्वी उद्बोधन
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल की प्रधान संचालिका श्रीमती व्रतिका आर्या जी ने महर्षि दयानन्द सरस्वती जी और आर्य मान्यताओं के सिद्धांतों के अनुरूप वीरांगनाओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने ओजस्वी भाषण में कहा:
“आर्य समाज की मान्यता हमेशा से ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ की रही है। महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने समाज में नारी को वही उच्च और गौरवमयी स्थान दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया था, जिसकी वे अधिकारी हैं। आज की नारी को केवल कोमल नहीं, बल्कि भीतर से वज्र के समान मजबूत बनना होगा। देश की बेटियों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी वैदिक संस्कृति, योग और आत्मरक्षा के कौशल को अपनाना होगा। जब एक बेटी संस्कारी और सशक्त बनती है, तो वह पूरे समाज और राष्ट्र का निर्माण करती है। इस शिविर का उद्देश्य हर युवती को शारीरिक रूप से सुदृढ़, मानसिक रूप से सजग और आध्यात्मिक रूप से तेजस्वी ‘आर्य वीरांगना’ बनाना है।”
महामहिम राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी का पावन सान्निध्य
उल्लेखनीय है कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र में यह ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिविर गुजरात के महामहिम राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी के पावन सान्निध्य और प्रेरणा से आयोजित हो रहा है। शिविर की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने के लिए गुरुकुल के प्रधान श्री राजकुमार गर्ग एवं उनकी पूरी टीम दिन-रात समर्पित भाव से जुटी हुई है।
इस शिविर के माध्यम से देश भर से आईं ये वीरांगनाएं न केवल शारीरिक रूप से सुदृढ़ बनेंगी, बल्कि बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से भी सशक्त होकर समाज व देश की उन्नति में अपना अमूल्य योगदान देंगी।
योगमय हुई कुरुक्षेत्र की धरा
शिविर के सायंकालीन सत्र में अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब स्वामी देवव्रत जी सरस्वती के कुशल नेतृत्व में सभी आर्य वीरांगनाओं ने एक साथ योगासनों का अभ्यास किया। अनुशासित कतारों में बैठी सैकड़ों बेटियों के योग कौशल ने पूरे परिसर को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
