पंचकूला। रायपुररानी क्षेत्र में पर्ल ग्रुप की अटैच जमीन की कथित अवैध बिक्री और रजिस्ट्री के मामले में तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला को गिरफ्तारी का डर है। ऐसे में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। इस याचिका पर 25 मई को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की अदालत में सुनवाई होगी।
यह मामला रायपुररानी क्षेत्र की 17.55 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित है, जिसे सुप्रीम कोर्ट और जांच एजेंसियों की रोक के बावजूद बेचे जाने का आरोप है। विजिलेंस ने विक्रम सिंगला, कानूनगो दीपक कुमार, पटवारी नरेंद्र कुमार डबास और जमीन मालिक सुरमुख सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज किया है।
जांच में पाया गया कि पर्ल ग्रुप और उसकी सहयोगी कंपनियों की संपत्तियां निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए पहले ही अटैच की जा चुकी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इन संपत्तियों की बिक्री, म्यूटेशन और रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद रायपुररानी तहसील में मिलीभगत से जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल मंजूर करने का आरोप है।
फतेहगढ़ साहिब निवासी सुरमुख सिंह की ओर से दी गई जीपीए के आधार पर हरदीप सिंह ने 22 दिसंबर 2025 को एसडीएम पंचकूला को आवेदन देकर राजस्व रिकाॅर्ड से बंदी आदेश हटाने की मांग की थी।
इसके बाद पटवारी नरेंद्र कुमार ने तहसीलदार विक्रम सिंगला के साथ मिलकर रिपोर्ट दर्ज की। 2 जनवरी 2026 को रजिस्ट्री नंबर 1491 और 1492 दर्ज की गईं, जिनमें सुरमुख सिंह ने करीब 4.20 करोड़ रुपये में 17.55 एकड़ जमीन बेच दी।
इस मामले में पहले भी शिकायतें हुई थीं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। विजिलेंस जांच में मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत पाया गया। मुख्य सचिव हरियाणा और डीजीपी विजिलेंस से मंजूरी मिलने के बाद आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। विक्रम सिंगला इससे पहले भी इसी मामले में जेल जा चुका है।
