अंबाला। हाथीखाना मंदिर से पूजा के बाद वापस रेडक्रास स्थित अपना घर में जा रहे बुजुर्ग 72 वर्षीय महेशचंद्र की मौत अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रह गई है। यह मामला जितना सामने दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा उलझा हुआ नजर आने लगा है।
एक बुजुर्ग को दिनदहाड़े बाइक पर जबरन बैठाकर सुनसान इलाके में ले जाना, फिर उस पर तेजाब फेंकना, चार दिन तक हालत स्थिर रहना और अचानक मौत हो जाना। घटनाओं की यह पूरी कड़ी कई ऐसे सवाल छोड़ रही है जो सामान्य लूट के इरादे की कहानी से मेल नहीं खाते।
महेशचंद्र पिछले 12 वर्षों से अपना घर में रह रहे थे। रोज की तरह वह 10 मई को हाथीखाना मंदिर से लौट रहे थे। रास्ते में तीन युवक मिले। उन्होंने मदद के नाम पर उन्हें बाइक पर बैठाने की कोशिश की। महेशचंद्र ने मना भी किया। लेकिन आरोप है कि युवकों ने उनकी टांगें पकड़कर उन्हें जबरदस्ती बाइक पर बैठा लिया।
इसके बाद बाइक सवारों ने उन्हें बाइक से फेंक दिया और पीछे से आए एक्टिवा सवार ने उनपर तेजाब फेंक दिया। यहीं से कहानी सामान्य अपराध से अलग दिखने लगती है। सवाल यह है कि आखिर तीन युवकों को एक 72 वर्षीय बुजुर्ग में ऐसा क्या दिखा कि उन्होंने दिनदहाड़े जोखिम उठाया? यदि इरादा सिर्फ लूट का था तो फिर सुनसान इलाके में ले जाकर तलाशी लेने के बाद तेजाब डालने की जरूरत क्यों पड़ी?
अस्पताल में जब सब ठीक था तो अचानक मौत कैसे
घटना का दूसरा सबसे रहस्यमय हिस्सा अस्पताल से जुड़ा है। महेशचंद्र को छावनी नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार दिन तक उनकी हालत स्थिर थी। न हार्टबीट असामान्य थी, न पल्स रेट। शरीर झुलसा जरूर था, लेकिन इतना गंभीर नहीं कि उन्हें पीजीआइ रेफर किया जाता। चार दिन से वह सभी से अच्छे से बात भी कर रहे थे और खाना भी खा रहे थे।
फिर पांचवें दिन वीरवार को अचानक मौत हो गई। यहीं से सवाल और गहरे हो जाते हैं। क्या मौत सिर्फ तेजाब की वजह से हुई? क्या शरीर के अंदर कोई धीमा जहर असर कर रहा था? क्या सामान्य एसिड नहीं था? या फिर डर, सदमा और उम्र ने मिलकर शरीर को अंदर से तोड़ दिया? या कुछ ऐसा जो सिर्फ आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगा।
विसरा जांच के लिए भेजा
पोस्टमार्टम के बाद गत वीरवार को विसरा जांच के लिए भेजा गया है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने तक यह मामला कई अटकलों को जन्म देता रहेगा। पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। एक सप्ताह बाद भी न कोई गिरफ्तारी हुई और न कोई ठोस खुलासा। स्थानीय लोगों के बीच अब यह चर्चा भी है कि कहीं यह वारदात किसी रैंडम टारगेट की नहीं बल्कि सोची-समझी पहचान की तो नहीं थी।
क्योंकि जिस तरीके से बुजुर्ग को पहले भरोसे में लेने की कोशिश हुई, फिर सुनसान जगह पर ले जाया गया और उसके बाद तेजाब का इस्तेमाल हुआ। वह सामान्य छीना-झपटी जैसा नहीं दिखता। पुलिस जांच अपनी जगह चल रही है, लेकिन जब तक आरोपित पकड़े नहीं जाते, तब तक महेशचंद्र की मौत एक ऐसी पहेली बनी रहेगी जिसमें हर जवाब के पीछे नया सवाल खड़ा है।
