अंबाला। देशभर के रेलवे स्टेशनों और परिसरों से अंग्रेजी हुकूमत की निशानियां हटाने के लिए रेलवे बोर्ड ने ताजे आदेश जारी किए हैं, मगर विडंबना यह है कि विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलखंड पर आज भी अंग्रेज इंजीनियर बड़ोग नाम का स्टेशन मौजूद है। जबकि इस रेल लाइन को सफल बनाने वाले बाबा भलकू के नाम पर एक भी स्टेशन नहीं है।

रेलवे औपनिवेशिक प्रतीकों, पदनामों और परंपराओं को खत्म करने की तैयारी में है, लेकिन पहाड़ों के बीच रेल मार्ग का सपना साकार करने वाले भारतीय लोकनायक को अब तक वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।

एक ओर भारतीय रेलवे देशभर के स्टेशनों, इमारतों और व्यवस्थाओं से अंग्रेजी हुकूमत के प्रतीकों को हटाने की तैयारी में जुट गया है, वहीं दूसरी ओर विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलखंड पर आज भी एक ऐसा नाम उपेक्षित है जिसने इस ऐतिहासिक ट्रैक को पूरा करवाने में निर्णायक भूमिका निभाई थी।

कौन हैं बाबा भलकू?

दरअसल, जब कालका-शिमला के बीच ट्रैक का निर्माण करवाया जा रहा था। सुरंग संख्या-33 के निर्माण के दौरान अंग्रेज इंजीनियर दोनों छोर मिलाने में असफल रहे थे। अपमानित होकर इंजीनियर बड़ोग ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद गांव झाजा के बाबा भलकू ने अपनी पारंपरिक समझ और पहाड़ों की जानकारी के आधार पर अंग्रेज इंजीनियरों को सही दिशा दिखाई।

लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब रेलवे अंग्रेजी हुकूमत की निशानियां मिटाने में जुटा है, तब कालका-शिमला रेलखंड पर अंग्रेज इंजीनियर बड़ोग के नाम पर बना स्टेशन अब भी मौजूद है, जबकि इस रेल लाइन को सफल बनाने वाले बाबा भलकू को आज तक वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।

बता दें रेलवे बोर्ड ने सभी जोनों को निर्देश जारी कर 14 मई तक ब्रिटिश काल के प्रतीकों, प्रथाओं और अवशेषों को चिन्हित कर हटाने को कहा है।

रेलवे स्टेशनों और दफ्तरों से ब्रिटिश शाही मुकुट, राजसी मोनोग्राम, औपनिवेशिक बैज, विक्टोरियन फर्नीचर, अंग्रेजी दौर की नाम पट्टिकाएं और साहिबी परंपराओं को समाप्त किया जाएगा। यहां तक कि बंदगला कोट, पीतल के बटन वाली वर्दियां, विलासी सैलून कोच और ‘योर ओबेडिएंट सर्वेंट’ जैसे शब्द भी इतिहास बन जाएंगे।

1903 में बना ट्रेक

नौ नवंबर 1903 से शुरू हुआ कालका-शिमला रेल का सफर सौ साल से अधिक गुजर जाने के बाद भी अनवरत जारी है। हिमालय की पहाड़ी पर स्थित यह स्टेशन समुद्र तट से 2800 फीट ऊपर है।

7000 फीट समुद्र तट की ऊंचाई वाले मशहूर पर्यटन स्थल शिमला में पहुंचा जाता है। मार्ग पर 18 रेलवे स्टेशन हैं। शिमला जाने वाले सैलानी बस के बजाय इस खिलौना ट्रेन से शिमला जाने को प्राथमिकता देते हैं।

इस ट्रेन का सफर इतना सुहाना है कि जितना मजा शिमला की हसीन वादियों में घूमने में आता है, उतना आनंद ये छह घंटे का सफर आपको देता है। सन 2008 में यूनाइटेड नेशन एजुकेशन, साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) इस ट्रैक काे वर्ल्ड हैरिटेज घोषित किया था।

अंग्रेजी हुकूमत की निशानियां हटाने के आदेश नहीं मिले: सीनियर डीसीएम

अंबाला रेल मंडल के सीनियर डीसीएम यशनजीत सिंह ने कहा कि रेलवे बोर्ड के ऐसे आदेश अभी मंडल में नहीं पहुंचे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्हाेंने माना कि कालका शिमला हेरिटेज सेक्शन में अंग्रेज इंजीनियर बड़ोग के नाम से स्टेशन है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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