अम्बाला नगर निगम आम चुनाव-2026, जिसके लिए मतदान आगामी रविवार 10 मई को निर्धारित है,  से पहले एक रोचक परन्तु महत्वपूर्ण  कानूनी विवाद खड़ा हो गया है.  नगर निगम के 20 वार्डों में चुनाव लड़ रहे सभी  65 उम्मीदवारों द्वारा स्वयं को पार्षद (Councillor) 

प्रत्याशी  बताने पर कड़ी  आपत्ति दर्ज कराई  गई है और इसे हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 के प्रावधानों के  विरूद्ध  बताया गया है.

अम्बाला नगर निगम के  वार्ड नंबर-12 के अंतर्गत पड़ने वाले सेक्टर 7 अर्बन एस्टेट निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून जानकार हेमंत कुमार, ने हरियाणा के राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण, अम्बाला मंडल आयुक्त एवं अम्बाला नगर  निगम चुनाव में पर्यवेक्षक (सामान्य) संजीव वर्मा, डी.सी. एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अजय तोमर, जिला  ए.डी.सी.  एवं अम्बाला नगर निगम चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर (आर.ओ.) विराट  एवं चारों सहायक रिटर्निंग ऑफिसर्स (ए.आर.ओ.)  को भेजे एक विस्तृत अभ्यावेदन मार्फ़त  उनके संज्ञान में यह तथ्य लाया है  कि अम्बाला नगर निगम के 20 वार्डों से चुनाव लड़ रहे सभी 65 उम्मीदवार चुनाव प्रचार के दौरान अपने पोस्टरों, बैनर, होर्डिंग, पंपलेट, स्टीकर और अन्य चुनावी  सामग्री में स्वयं को वार्ड से  पार्षद (Councillor) 

पद का प्रत्याशी बता रहे हैं, हालांकि वास्तविकता यह है कि न  केवल  हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में बल्कि इस कानून के अंतर्गत बनाये गये हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमों, 1994  में पार्षद (Councillor) जैसा  कोई पदनाम ही  नहीं है। उक्त  कानून और निर्वाचन नियमों  में स्पष्ट रूप से वार्डों से निर्वाचित होने वाले नगर निगम के जन-प्रतिनिधियों के लिए सदस्य (Member) शब्द का प्रयोग किया गया है.

गत दिवस 5 मई को अम्बाला मंडल आयुक्त द्वारा मामले का संज्ञान लेकर उपायुक्त (डी.सी.), अतिरिक्त उपायुक्त (ए.डी.सी.) और न.नि. आयुक्त को इस सम्बन्ध में पत्र भेजकर  नियमानुसार कार्रवाई करने उपरान्त प्रति को अवगत कराने बारे लिखा गया है.

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