जीवन में वास्तविक शांति और संतुलन लाना गीता से संभव:स्वामी ज्ञानानंद महाराज
उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने हिंदू हाई स्कूल के परिसर में पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
लाडवा, 10 मार्च।  
  हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने कहा कि जब हम गीता के ज्ञान को सुनते हैं तो हमें केवल धर्म की बातें ही नहीं मिलती, बल्कि जीवन को सही ढंग से जीने की प्रेरणा भी मिलती है। श्रीमद भगवत गीता हमें सिखाती है कि हमें अपने कर्तव्यों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाना चाहिए। गीता का सबसे बड़ा संदेश है कर्म करो और फल की चिंता मत करो। यदि हम इस एक बात को अपने जीवन में अपना लें तो जीवन की बहुत-सी परेशानियां अपने आप कम हो जाती हैं। हमारी भारतीय संस्कृति और परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां अध्यात्म और जीवन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने मंगलवार को लाडवा के हिंदू हाई स्कूल में स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सानिध्य में आयोजित दिव्य गीता सत्संग में शिरकत की। उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने हिंदू हाई स्कूल के परिसर में पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने स्वामी ज्ञानानंद महाराज को पुष्प गुच्छ आशीर्वाद लिया और स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने उपाध्यक्षा सुमन सैनी को पवित्र ग्रंथ गीता भेंटकर स्वागत किया।
उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने कहा कि दिव्य गीता सत्संग जैसे आध्यात्मिक कार्यक्रम में उपस्थित होना वास्तव में हमारे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा का विषय है। विशेष रूप से  स्वामी ज्ञानानंद महाराज के पावन सानिध्य में बैठकर श्रीमद भगवत गीता के संदेश को सुनना और समझना हम सबके जीवन को नई दिशा देता है। हमारी संस्कृति में हमेशा से कहा गया है कि सत्संग मनुष्य के जीवन को बदलने की शक्ति रखता है। अच्छे विचार सुनने से मन शुद्ध होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। इसलिए हमें ऐसे कार्यक्रमों में अधिक से अधिक भाग लेना चाहिए और अपने परिवार के सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।
उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सब कई प्रकार के तनाव और चिंताओं से घिरे रहते हैं। ऐसे समय में गीता का ज्ञान हमें मानसिक शांति देता है और सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है। गीता हमें बताती है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी हमें धैर्य, विश्वास और सकारात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लाडवा की इस पवित्र धरती पर यह दिव्य गीता सत्संग का आयोजन समाज में अच्छे संस्कारों को बढ़ावा देते हैं और नई पीढ़ी को हमारी महान संस्कृति से जोड़ते हैं। जब बच्चे और युवा इस प्रकार के सत्संग में आते हैं, तो उन्हें जीवन के सही मूल्य समझने का अवसर मिलता है।
उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने इस आयोजन से जुड़े सभी आयोजकों और सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि आप सबकी मेहनत और सेवा भावना के कारण ही समाज में इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्यक्रम संभव हो पाते हैं। इसके साथ ही स्वामी ज्ञानानंद महाराज से प्रार्थना करते हुए कहा कि वे इसी प्रकार अपने ज्ञान और आशीर्वाद से सभी का मार्गदर्शन करते रहें। उनके सत्संग से हमें जीवन को सही दिशा में ले जाने की प्रेरणा मिलती रहे।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्रीमद् भागवत गीता के ज्ञान की वर्षा करते हुए कहा कि गीता से जीवन में वास्तविक शांति और संतुलन लाया जा सकता है। श्रीमद् भगवत गीता एक ऐसा दर्पण है जो हमें वास्तविकता दिखाता है कि मन अशांत क्यों है और इसे चिंताओं से मुक्त कर शांत कैसे किया जा सकता है। गीता संपूर्ण मानवता की मुस्कान है और हर समस्या का समाधान हैं। उन्होंने कहा कि गीता केवल मोह निवृत्त नहीं कराती, बल्कि जीवन की गाड़ी के लिए दिशा और लक्ष्य तक पहुचाने वाली शक्ति भी है। यदि गीता की प्रेरणाएं जीवन में आ जाएं, तो निश्चित रूप से व्यक्ति का मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ता है।
इस अवसर पर चेयरमैन डॉ. गणेश दत्त, नपा चेयरपर्सन साक्षी खुराना, बंतो कटारिया, मंडल अध्यक्ष शिव गुप्ता, मंडल अध्यक्ष विकास शर्मा, मंडल अध्यक्ष नरेंद्र दबखेड़ा, प्रधान प्रदीप सहगल, प्रिंसिपल योगिता, सुशील राणा, पूनम सैनी, मोनिका गुप्ता, सन्नी कालड़ा, अनिल माटा, मनीराम, धीरज वालिया, अनिल गुप्ता, सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

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