बेंगलुरू में बैठक कर भड़के किसान नेता राकेश टिकैत और रतन मान
बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्तर की बैठक में देशभर के किसान नेताओं और बुद्धिजीवियों ने उठाए सवाल
जलवायु परिवर्तन के नाम पर बन रहे कानूनों की समीक्षा की मांग
करनाल 10 मार्च। बेंगलुरु में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए किसान नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने कार्बन क्रेडिट नीति, जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़े नए कानूनों पर गंभीर चर्चा की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा कार्बन क्रेडिट नीति में कई ऐसी कमियां हैं, जिनका आने वाले समय में सबसे अधिक नुकसान किसानों और कृषि क्षेत्र को उठाना पड़ सकता है। मुख्य रूप से भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने इस योजना को पूंजीपतियों के हित में और किसानों की जमीन कंपनियों के सुपुर्द करने का सुनियोजित प्लान बताया।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के नाम पर बनाए जा रहे कई नियम और नीतियां उद्योगों और बड़ी कंपनियों को बचाने के लिए तैयार किए जा रहे हैं, जबकि किसानों की भूमिका और हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। यदि इन नीतियों में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में किसान अपनी जमीन, खेती के अधिकार और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण खो सकते हैं।
बैठक में यह भी कहा गया कि कार्बन क्रेडिट जैसी व्यवस्था का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचाने के बजाय बड़ी कंपनियों और उद्योगों को आर्थिक लाभ देने की दिशा में काम हो रहा है। कई वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कंपनियों को पर्यावरणीय नियमों से राहत देने और उनके उत्सर्जन को संतुलित दिखाने के लिए कार्बन क्रेडिट का उपयोग किया जा रहा है, जबकि वास्तविक पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
चर्चा के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि यदि कार्बन क्रेडिट नीति को सही तरीके से लागू किया जाए, तो इससे किसानों को अतिरिक्त आय मिल सकती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में किसानों की भागीदारी और अधिकार स्पष्ट नहीं हैं। नीति में पारदर्शिता, स्पष्ट नियम और किसानों के हितों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
इस कार्यक्रम में प्रमुख किसान नेता राकेश टिकैत भी शामिल हुए। इसके अलावा हरियाणा से प्रदेश अध्यक्ष, महाराष्ट्र से स्टेट प्रेसिडेंट, कर्नाटक के युवा किसान नेता मंजू किरण, तथा राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से आए किसान नेताओं और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार रखे।
नीतियां बनाना जरूरी
वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नीतियां बनाना जरूरी है, लेकिन इन नीतियों में किसानों की भागीदारी और हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक के दौरान किसानों से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई, जिनमें मिट्टी की सेहत, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, जल संरक्षण, और कृषि को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उपाय शामिल थे। वक्ताओं ने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए नीतियों में उन्हें केंद्र में रखना आवश्यक है।
समीक्षा की मांग
बैठक के अंत में किसान नेताओं और बुद्धिजीवियों ने सरकार से मांग की कि कार्बन क्रेडिट नीति और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कानूनों की व्यापक समीक्षा की जाए और किसानों के अधिकारों की स्पष्ट सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया, तो देशभर के किसान संगठित होकर इसके खिलाफ आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
इस अवसर पर कर्नाटक के किसान नेता मंजू किरण ने मंच संचालन किया और डाक्टर अफसर जाफरी और डाक्टर वेदप्रकाश ने इस कानून की समीक्षा कर समझाया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *