जनवरी से जुलाई 2025 तक 55 केसों में 60 दोषियों को सुनाई गई सजा

करनाल, 31 अगस्त- करनाल के जिला न्यायवादी डॉ. पंकज सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश को नशा मुक्त बनाने एवं समाज को नशे की लत से छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से नशा कानूनों को सख्ती से लागू कर रही है। इस दिशा में एनडीपीएस एक्ट की सात माह की जनवरी से जुलाई 2025 की करनाल जिला की नशा संबंधी मामलों में सजा सुनाने में 91 प्रतिशत औसत रही है।

सैशन कोर्ट में 50 केसों  में दोषियों को सजा, 5 केसों में आरोपी बरी
जिला न्यायवादी डॉ. पंकज सैनी ने बताया कि जनवरी से जुलाई 2025 तक के नशा संबंधी मामलों में सैशन कोर्ट द्वारा 55 केसों में से 50 केसों में आरोपियों  को सजा सुनाई गई है व 5 केसों में आरोपियों को बरी किया गया है। इन मामलों में दोषियों से आफीम, गांजा, चरस व स्मैक आदि अधिक मात्रा में बरामद किए गए थे। जिनके ट्रायल करनाल सैशन कोर्ट में चल रहे थे। नशा संबंधी मामलों को लेकर करनाल जिला में 4 महीनें पहले स्पेशल कोर्ट भी बनाई गई है। इस कोर्ट में केवल अधिक मात्रा में आरोपियों से प्राप्त नशा संबंधित सामग्री जैसे आफीम, गांजा, चरस व स्मैक आदि के ट्रायल चलाए जाते हैं। नशा संबंधी स्पेशल कोर्ट के बनाए जाने से कोर्ट में चल रहे ट्रायल की सुनवाई जल्दी होती है और आरोपियों को जल्द ही सजा सुनाई जाती है।

नशा को लेकर छात्रों को किया जा रहा है जागरूक
जिला न्यायवादी डॉ. पंकज सैनी ने कहा कि नशा संबंधी मामलों को गंभीरता लेते हुए प्रत्येक माह उपायुक्त उत्तम सिंह द्वारा बैठक आयोजित की जाती है। बैठक में पुलिस विभाग, जिला न्यायवादी, स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग, ड्रग नियंत्रण अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, नोडल अधिकारी, एचएसएनसीबी, करनाल आदि अधिकारी बैठक में शामिल होते हैं। जिसमें उपायुक्त महोदय के द्वारा समय-समय पर सभी अधिकारियों को स्कूल व कालेज के साथ-साथ जनता को नशा संबंधी बुराईयों के बारे में जागरूक करने संबंधी कैम्प लगाए जाने के आदेश दिए जाते हैं, ताकि बच्चों व बड़ों को नशा संबंधी बुराईयों के बारे में जागरूक किया जाए।

जिला न्यायवादी डॉ. पंकज सैनी ने बताया कि सरकार व उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशों अनुसार एनडीपीसी एक्ट नशा संबंधी मामलों में जिला को नशा मुक्त करने का प्रयास जारी है। कोर्ट में गवाहों व सबूतों को हमारे सरकारी वकीलों के द्वारा ठोस मजबूती के साथ पेश करते हुए आरोपियों को अधिक से अधिक सजा दिलाने का उद्देश्य रहता है। सजा के प्रावधान से नशे के कारोबार से संलिप्त लोगों को भी यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि इस कारोबार में संलिप्त होना सलाखों के पीछे पहुंचना है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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