भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में साहित्य की महक से महका वातावरण
करनाल, 8 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में दयाल सिंह कॉलेज, करनाल द्वारा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी (उर्दू प्रकोष्ठ) के सहयोग से एक भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से पधारे ख्याति प्राप्त कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन ने कविता की शक्ति, उसकी सामाजिक प्रासंगिकता एवं साहित्य की प्रभावशीलता को नए आयाम दिए। उद्घाटन समारोह में अतिथियों का भव्य स्वागत। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं वंदना के साथ हुआ। कॉलेज  प्राचार्या डॉ. आशिमा गक्खड़ एवं प्राध्यापकों ने मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी एवं साहित्यकार रेशमा कल्याण मीरा सहित अन्य अतिथियों का पौधा भेंट कर स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कविता की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कविता केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने, भावनाओं को अभिव्यक्त करने और सौंदर्यबोध को जागृत करने का सशक्त माध्यम है। इस अवसर पर  मुख्य अतिथि, वरिष्ठ रंगकर्मी एवं साहित्यकार रेशमा कल्याण मीरा ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज का दर्पण होते हैं, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल साहित्यकारों और कलाकारों को मंच प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को भी जागृत करते हैं। उन्होने विद्यार्थियों को सशक्त बनने कि प्रेरणा देते हुए कहा कि ज्ञान और संस्कार ही वास्तविक शक्ति हैं, जो आपके व्यक्तित्व को निखारते हैं और समाज में आपकी पहचान स्थापित करते हैं। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कविताएँ गृहणी और बंजर का पाठ करते हुए नारी के संघर्ष, समर्पण और सहनशीलता को मार्मिक शब्दों में प्रस्तुत किया।
चूल्हे की आँच में जलती रही, फिर भी उजालों की आस रही,
अपनों के सपनों में ढलती रही, खुद के लिए न कोई सांस रही।ज्ज्  (गृहणी) च्च्धरती सी कोमल, मगर बंजर बनी, उम्मीदों के बीज भी सूख गए,
स्नेह की बारिश को तरसती रही, कुछ सपने आँखों में धूल गए। (बंजर)
इन कविताओं के माध्यम से उन्होंने नारी के वास्तविक जीवन के संघर्ष और उसकी गहरी संवेदनाओं को उजागर किया।
इस अवसर पर दयाल सिंह कॉलेज प्रबंधन समिति के प्रधान डी.के. रैना जी का सानिध्य प्राप्त हुआ, जबकि महासचिव सतीश सोनी जी ने अध्यक्षता की।
ख्याति प्राप्त कवियों की अनुपम प्रस्तुतियाँ-
इस कवि सम्मेलन में देशभर के सुप्रसिद्ध कवियों ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण और प्रेरणादायक रचनाएं प्रस्तुत कीं। श्रोताओं की तालियों की गडग़ड़ाहट से सभागार गूंज उठा। इस सम्मेलन में छह आमंत्रित कवियों चरणजीत चरण, विनीत पांडेय,दिनेश शर्मा, राधाकांत पांडेय, मेघश्याम मेघ एवं कवयित्री अनामिका वालिया शर्मा ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर काव्यपाठ किया—
चरणजीत चरण ने साहित्य,समाज, राजनीति, संस्कृति और नैतिकता को केंद्र में रखकर अपने भावनात्मक और प्रभावशाली छंदों से सभी को प्रभावित किया। उनकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ—
यकीं था हम जवानी में मिलेंगे,
न सोचा था कहानी में मिलेंगे।
कभी मन हो तो मिलने आइएगा,
तुम्हें हम राजधानी में मिलेंगे।
ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।
विनीत पांडेय  हास्य और व्यंग्य के सुप्रसिद्ध कवि ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
उनकी यह रचना—
फूल बनकर महक जाना जिंदगी है,
गीत सुख के गुनगुनाना जिंदगी है।
गम के बादल आएंगे और जाएंगे,
गम भुला कर मुस्कुराना जिंदगी है।
ने जीवन के सकारात्मक दृष्टिकोण को खूबसूरती से प्रस्तुत किया।
दिनेश शर्मा की ओजस्वी कविताओं में देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति की भावना प्रबल रूप से दिखाई दी। उनकी रचना—
जवानी रूप रंग दौलत समय के साथ लद जाता,
नशा जो हो हुकूमत का काल का त्रास कहलाता।
उगा जो शान से सूरज मगर वो ढल ही जाएगा,
सदा तो दुनिया में सिक्का किसी का चल नहीं पाता।
ने देशभक्ति के जज्बे को जागृत किया।
राधाकांत पांडेय ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रृंगार और वीर रस की सजीव अभिव्यक्ति की, साथ ही राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उनकी पंक्तियाँ
—ज्ञान और भक्ति का भी मान रखियेगा किन्तु,
भूलिए नहीं कभी महत्व निज शक्ति का।
राष्ट्र याकि परिवार एक से न होगा श्रेष्ठ,
योगदान जुड़ता है हर एक व्यक्ति का।
ने राष्ट्र प्रेम की भावना को प्रबल किया।
मेघश्याम मेघ ने वसुधैव कुटुंबकम के भाव को केंद्र में रखते हुए अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में एकजुटता और विश्व शांति का संदेश दिया।
अनामिका वालिया शर्मा ने अपनी भावनात्मक कविता के माध्यम से देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी कविता ने समूचे सभागार को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया।
विशिष्ट अतिथियों का सम्मान
इस अवसर पर शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महान विभूतियों को सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले प्रमुख व्यक्तित्व थे—
1. सुदेश ठुकराल,जिला शिक्षा अधिकारी, करनाल
2. डॉ. अनीता जून, प्राचार्या, महर्षि दयानंद महिला राजकीय महाविद्यालय, दादुपुर रोड़ान
3. डॉ. मीनू शर्मा, प्राचार्या, के. वी. ए. डी. ए. वी. कन्या महाविद्यालय, करनाल
4. डॉ. राकेश संधू, प्राचार्या, डॉ. गणेश दास डी. ए. वी. कन्या शिक्षण महाविद्यालय, करनाल
5. डॉ. नीना अरोड़ा, सदस्य, दयाल सिंह कॉलेज प्रबंधन समिति
6.डॉ. पम्पा सेन गुप्ता, सदस्य, दयाल सिंह कॉलेज प्रबंधन समिति

कवि सम्मेलन में उत्कृष्ट मंच संचालन और गरिमापूर्ण समापन।
इस अवसर पर डॉ. सुभाष सैनी ने अपने प्रभावशाली एवं कुशल मंच संचालन से कार्यक्रम को शानदार ढंग से प्रस्तुत किया, जबकि समापन पर डॉ. अनीता अग्रवाल ने गरिमापूर्ण शब्दों में धन्यवाद ज्ञापन किया।
श्रोताओं ने सराहा, विद्यार्थियों ने उठाया लाभ
इस कार्यक्रम में 550 से अधिक छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। इसके अलावा, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, शहर के गणमान्य व्यक्ति एवं साहित्य प्रेमी और कॉलेज स्टाफ़  भी इस आयोजन के साक्षी बने। सभी ने इस आयोजन की भरपूर सराहना की और इसे एक प्रेरणादायक एवं यादगार कार्यक्रम बताया।
यह कवि सम्मेलन केवल साहित्य प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए भी एक ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक आयोजन सिद्ध हुआ। इस कार्यक्रम ने कविता की शक्ति, उसकी सामाजिक प्रासंगिकता और उसकी प्रभावशीलता को भली-भांति स्थापित किया। इस अवसर ने साहित्य और संस्कृति को एक नई दिशा दी और समाज को प्रेरित किया कि कविता केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है।
इस आयोजन की सफलता में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, दयाल सिंह कॉलेज शाखा, करनाल और क्षीरधारा स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड का अमूल्य योगदान रहा, जिसके लिए कॉलेज ने  उनका हृदय से आभार व्यक्त किया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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