जनसंचार संस्थान का ओडियो-वीडियो स्टूडियो होगा अपग्रेड : प्रोफेसर महासिंह पूनिया
दिल का दिल से कनेक्शन है रेडियो : विनयश्री
आकाशवाणी ही रेडियो की असली परिभाषा हैः विनयश्री
जनसंचार संस्थान रेडियो के क्षेत्र में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से करेगा एमओयू
कुरुक्षेत्र, 13 फरवरी।
 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान में ‘विश्व रेडियो दिवस-2025 की थीम ‘जलवायु परिवर्तन और रेडियो’ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रोफेसर महासिंह पूनिया ने मुख्य वक्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि रेडियो ने विश्व के विकास में उत्कृष्ट योगदान दिया है जिससे संस्कृति सभ्यता के साथ कृषि संचार, शिक्षा, सूचना और प्रौद्योगिकी के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और निभा रहा है। उन्होंने कहा कि रेडियो अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन संबंधित तमाम सूचनाओं को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि रेडियो का कल भी दौर था, आज भी दौर है और आगे भी दौर रहेगा।
निदेशक प्रोफेसर महासिंह पूनिया ने कहा कि संस्थान जल्द ही ओडियो-विडियो स्टूडियो को अपग्रेड करेगा। इसके लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने स्वीकृति प्रदान की है जिसके लिए संस्थान उनको विशेष आभार प्रकट करता है। उन्होंने कहा कि संस्थान कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के कुशल नेतृत्व सफलता की बुंलदिया प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि जनसंचार संस्थान रेडियो के क्षेत्र में जल्द ही सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से एक एम.ओ.यू. करेगा जिसके तहत दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों को लाभ होगा जिसके तहत फैक्लटी एक्सचेंज भी प्रोग्राम करेगा।
इस अवसर पर आकाशवाणी केंद्र कुरुक्षेत्र की हेड विजयश्री ने रेडियो की स्थापना से लेकर आजादी की लड़ाई में भारत छोड़ो आंदोलन में उषा मैहता के ‘सीक्रेट रेडियो’ के योगदान के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रेडियो जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन में अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका में है क्योंकि रेडियो की पहुंच जहां 1947 में महज 11 प्रतिशत थी वही वर्तमान में 99.18 प्रतिशत हो चुकी है। उन्होंने आकाशणी केंद्र कुरुक्षेत्र की ‘मलेरिया रोकथाम’ में दिये गए योगदान को प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सराहना करने की खुशी जताई।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. सुरेश वर्मा, उप-निदेशक सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने कहा कि हम रेडियो के माध्यम से सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना सीखते हैं। भारत में रेडियो आपकी बोली और भाषा में आप तक पहुंचता है जिससे आप सूचनाओं के माध्यम से उन्नत होते हो क्योंकि रेडियो ही संचार का एक ऐसा माध्यम है जिसमें आप अपने क्रियाक्लाप करते हुए भी रेडियो के माध्यम से जुड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि पारपंरिक और आधुनिकता के दौर में चलते हुए रेडियो ने अपनी शुद्वता, संक्षिप्ता, स्पष्टता बनाये रखता है। उन्होंने कहा कि रेडियो का अत्याधुनिक माध्यम अब पॉडकास्ट के रूप में बदल गया है जो नित्य श्रोताओं तक पहुंच रहा है।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे संस्थान के प्राध्यापक डॉ. आबिद अली ने कहा कि विश्व रेडियो दिवस यूनिस्कों द्वारा 2012 में आरंभ किया था जिसको मनाने की परम्परा वर्तमान तक संस्थान बनाये हुए है और वह भविष्य में भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संस्थान अपने विद्यार्थियों को रेडियो से जोड़े रखेगा और रेडियो में करिअर बनाने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा।
विश्व रेडियो दिवस कार्यक्रम पर विद्यार्थियों ने रेडियो स्वर्गीय सुप्रसिद्ध उदघोषक अमीन सयानी को उनके रेडियो के सफर पर अपनी प्रस्तुतियों द्वारा भावभीनी श्रद्वाजंलि दी। रेडियो के पुराने हिंदी गीतों को भी याद किया गया।
इस अवसर संस्थान की प्राध्यापिका डॉ. मधुदीप ने रेडियो दिवस पर पहुंचे मुख्य वक्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि रेडियो दिवस सफलता पूर्वक मनाया गया और समापन पर विद्यार्थियों और साथी प्राध्यापकों, तकनीकी स्टाफ और सभी भागीदारों तहेदिल से शुक्रिया किया। इस अवसर संस्थान के प्राध्यापक डॉ. अभिनव, डॉ. रोशन लाल, डॉ. तपेशकिरण, गौरव कुमार, सुनीता, रितु, अर्पणा, डॉ सतीश राणा, राजेश कुमार, जितेंद्र कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार, कंचन, प्रीति, सन्नी, नितिन कुमार, राहुल अरोड़ा सहित शोद्यार्थी और विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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