पेठा बाजार में लोग कर रहे गज्जक रेवड़ी की खरीददारी। त्यौहार पर रौनक बढ़ी पर बारिश के कारण ग्राहकी प्रभावित।
रेवाड़ी/लोहड़ी एवं मकर संक्रांति पर रेवाड़ी के बाजार मूंगफली रेवड़ी और गजक आदि से सज गए है। इन दिनों सर्दी के मौसम में रेवड़ी और गजक के लिए शहर का पेठा बाजार अपनी मीठी सौंधी खुशबू से लोगों को ललचाने लगा है। गुड़, तिल और काजू आदि से बनी रेवड़ी और मूंगफली गजक की महक लोगों की सांसों में भरने लगी है। ऐेसे में लोग अपनी पसंद के अनुसार गजक व तिल से बनी चीजें खरीद रहे हैं। लोहड़ी और मकर संक्रांति के त्योहार पर बाजारों में रौनक बढ़ गई है लोग जमकर खरीददारी कर रहे हैं। गजक रेवड़ी के थोक विक्रेता विजय कुमार और संजय सेठी आदि ने बताया कि त्यौहार में एक दो दिन का समय शेष रह गया है आज से काम अच्छा चलने की उम्मीद थी लेकिन बारिश के कारण ग्राहकी पर काफी असर पड़ रहा है और सारा काम चौपट हो गया अगर कल भी ऐसा मौसम रहा तो बिक्री कम होने की संभावना है।
रेवाड़ी के मुख्य बाजार में दुकानों पर गुड़ और तिल समेत मूंगफली से बनी गजक के काउंटर महकने लगे है। जबकि सड़क किनारे शाम को मौसम में ठंडक बढ़ने के साथ ही गजक, रेवड़ी और मूंगफली के ठेले कतार से खड़े दिखने लगे है। ऐसे ठेले एक-दो नहीं बल्कि दर्जनभर ठेलों के काउंटर लगे है। गुड़ गजक, गुड़ व तिल के लड्डू, गजक चक्की एवं मूंगफली की गजक की मांग भी अधिक है। गुड शक्कर की गजक आदि के पैकेट की भी बाजार में बिक्री हो रही है। दुकानों पर हर जगह ठेलों पर सर्दी में गुड़ के उत्पादों की अच्छी बिक्री हो रही है। आमतौर पर हाथ से कूट कर गुड़ तेल की गजक अधिक पसंद की जा रही है। वहीं तिल गुड़ से बनी गजक का चलन वर्षों पुराना है, लेकिन बदलते जमाने के साथ गजक बनाने का तरीका और वैरायटी में भी अंतर आया है। पहले गजक के रूप में तिल्ली की रेवड़ियां, गुड़ व शक्कर की गजक का चलन ज्यादा था। आधुनिकता के जमाने में अब मावा, मूंगफली, घी और काजू से बनी गजक लोगों की पहली पसंद बन गई है। ठंड भगाने के लिए गजक उपयोगी मानी जाती है। जानकारों के अुनसार गुड़ की गजक को दूध के साथ खाने से ठंड का प्रभाव कम हो जाता है। ठंड के मौसम में तिल्ली की गजक मावे का काम करती है। लोहड़ी व मकर संक्रांति पर्व को लेकर बाजारों में रौनक छाई हुई है। मूंगफली और रेवड़ी की खूब बिक्री हो रही है। शहर के बाजारों के अतिरिक्त विभिन्न स्थानों पर इनकी बिक्री देखी जा रही है। दोनों पर्वों पर शहर में अलग-अलग स्थानों कार्यक्रम होंगे इसकी तैयारी में लोग जुटे हैं। लोहड़ी व मकर संक्रांति पर्व के लिए मूंगफली के साथ-साथ रेवड़ी की भी खासी बिक्री हो रही है। शहर में विभिन्न स्थानों पर लगी तमाम स्टालों पर पिछले कई दिनों से ही ग्राहकों की काफी भीड़ है। जिस तरह से मूंगफली और रेवड़ी की बिक्री बढ़ रही है। पिछले साल की तुलना में बार पिछले वर्ष के मुकाबले कुछ ज्यादा ही है। शहर में मूंगफली 140 से 170 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच है हालांकि अच्छी किस्म की मूंगफली के दाम इससे भी ज्यादा हैं। दुकानदारों रोहताश, राकेश, सुभाष का कहना है कि अन्य चीजों की तरह ही महंगाई का असर मूंगफली व रेवड़ी के दामों पर भी है। गुड़ की रेवड़ी 160 से 200 रुपये किलोग्राम तो चीनी की 140 से 170 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है लेकिन त्योहार की उमंग के बीच महंगाई कोई मायने नहीं रखती, लोग इनकी खूब खरीदारी कर रहे हैं। उधर मकर संक्रांति पर्व पर विवाहित बहनों के घर दिए जाने वाले शगुन में भी मूंगफली व रेवड़ी का अहम स्थान माना जाता है। जिसके चलते इसकी खूब बिक्री हो रही है। शहर के झज्जर रोड पर स्थित सब्जी मंडी के पांच वर्षों से मौसमी वस्तुओं की स्टॉल लगाने वाले महाबीर का कहना है कि इस सीजन में सर्दी ज्यादा होने से मूंगफली की बिक्री ज्यादा हो रही है। इसके पीछे जहां एक तरफ सर्दी अहम कारण है वहीं मकर संक्रांति पर्व तक ही मूंगफली की मांग ज्यादा होती है। इस कारण ग्राहकों की संख्या भी अधिक है। इसके अलावा हलवाइयों की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी रही।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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