नवाचार पूर्व और नूतन ज्ञान के आधार पर ही संभव- प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान।

श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में मंगलवार को धनतेरस पर 9वां आयुर्वेद दिवस धूमधाम के साथ मनाया गया। सुबह हवन यज्ञ में आहुति के साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की गई और अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेव उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने की। जिनका स्वागत व अभिनंदन रजिस्ट्रार कृष्ण कुमार जाटियान द्वारा किया गया। रोग निदान एवं विकृति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ. दिप्ति पराशर ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी गणमान्य अतिथियों के समक्ष प्रस्तुत की। इस अवसर पर प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने अपने संबोधन में कहा कि आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वंतरि है, जो अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए। इस दिन उत्तम स्वास्थ्य की कामना के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। मगर धनतेरस दिवस केवल गोल्ड और चांदी की खरीदारी तक सीमित गया है, जबकि रोग मुक्त जीवन और ज्ञान की प्राप्ति व्यक्ति के जीवन का असली धन रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में नवाचार को अपनाकर प्राचीन मूल्यवान प्राचीन ज्ञान को खोए बिना मूल्य संवर्धन होना चाहिए। आज हर व्यक्ति अच्छे स्वास्थ्य के साथ स्थाई उपचार चाहता है आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति इस मामले में उपयोगी है। कोरोना महामारी के दौरान पूरा विश्व आयुर्वेद की क्षमता को पहचान भी गया है। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने विश्वविद्यालय परिवार को आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि चिंतन और मनन के बल पर ही नवाचार संभव है और नवाचार  पूर्व और नूतन ज्ञान के आधार पर ही संभव हो सकता है। लेकिन बुद्धिमान दोनों को तार्किक कसोटी पर कसकर ही आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान तो मनुष्य ने अर्जित कर लिया, मगर क्या इसका उपयोग अपने लिए कर रहे है। इसलिए जीवन की सफलता के लिए आवश्यक है ज्ञान, दर्शन और चरित्र की दूरी को मिटाना, उसमें सामंजस्य स्थापित करना। रिसर्च एंड इनोवेशन विभाग के डायरेक्टर डॉ. अनिल शर्मा द्वारा आयुर्वेद का वैश्विक परिप्रेक्ष्य और स्वस्थवृत विभाग की सहायक प्रो. डॉ. शितल महाडिक द्वारा आहार-विहार विषय की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के अन्त में डॉ. मनीषा खत्री द्वारा सभी आगंतुकों का आभार प्रकट किया गया। इस अवसर पर डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. जेके पंडा, प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना, डॉ. सतीश वत्स, डॉ. अमित कटारिया, डॉ. पीसी मंगल, डॉ. रवि राज, डॉ. मनोज तंवर, डॉ. सुधीर मलिक, डॉ. कृष्ण कुमार, शुभा कौशल, डॉ. कुलजीत कौर और डॉ. सुनीति मौजूद रही।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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