हरियाणवी पणिहारी और प्रयागराज के ढेड़िया नृत्य से कलाकारो ने बांधा समां
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बसंत उत्सव में उत्तरप्रदेश के कलाकारों ने मोहा दर्शकों का मन, झूमर, ढेड़िया और पूर्वी नृत्य की दी दमदार प्रस्तुतियां
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कुरुक्षेत्र 18 फरवरी। भगवान राम, लक्ष्मण और सीता चौदह वर्ष के वनवास के बाद रावण वध करके जब अयोध्या लौट रहे थे तो अयोध्यावासियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। अयोध्या की महिलाओं ने श्रीराम के स्वागत में मिट्टी के घड़े पर दीया रखकर नृत्य किया और भगवान राम की नजर उतारी। अयोध्या की महिलाओ द्वारा किया गया ये नृत्य ढेडिया कहलाया। उसी नृत्य की झलक हरियाणा कला परिषद द्वारा कला कीर्ति भवन में चल रहे बसंत उत्सव के सातवें दिन आयोजित कार्यक्रम में दिखी। प्रत्येक दिन हरियाणा कला परिषद द्वारा हरियाणा के लोक कलाकारों के साथ-साथ विभिन्न प्रदेशों के कलाकारों को आमंत्रित कर बसंत उत्सव मनाया गया। इसी कड़ी में सातवां दिन उत्तर प्रदेश के नाम रहा। जिसमें प्रयागराज से आनंद किशोर के दल द्वारा उत्तर प्रदेश के लोकनृत्य प्रस्तुत किये गए। इस मौके पर संस्कार भारती कुरुक्षेत्र ईकाई के अध्यक्ष डा. अशोक शर्मा मुख्यअतिथि के रुप में पहुंचे। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्यअतिथि अशोक शर्मा तथा हरियाणा कला परिषद के निदेशक नागेंद्र शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। वहीं मुख्यअतिथि तथा दर्शकों का स्वागत करते हुए नागेंद्र शर्मा ने कहा कि हरियाणा कला परिषद का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की कला और संस्कृति का विस्तार करना है, जिसकी पूर्ति करते हुए कला परिषद द्वारा लोक कलाकारों को अवसर दिया जा रहा है। मुख्यअतिथि डा. अशोक शर्मा ने दर्शकों को सम्बोंधित करते हुए कहा कि लोक कलाकारों का सरंक्षण और संवर्धन बेहद जरुरी है। लोक कलाकार ही अपनी प्रतिभा के माध्यम से प्रदेश की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। आधुनिकता के दौर में प्रादेशिक कलाकारों को मंच मुहैया करवाकर हरियाणा कला परिषद द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है। मंच का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति हरियाणा प्रदेश की रही। जिसमें पलवल से मनोज ठाकुर व दल के कलाकार नीरज व ईशिता ने देवर-भाभी की बातचीत पर आधारित गीत मेरे पाछै-पाछै आवण का भला कोण सा मतबल तेरा सै पर सुंदर प्रस्तुति दी। इसके बाद उत्तरप्रदेश के प्रयागराज से आए कलाकारों ने ढेडिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। सिर के ऊपर छिद्र वाले मटके में दिये रखकर नृत्य करती हुई कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। भगवान राम के वनवास से लौटने पर उनकी नजर उतारने के दृश्य को कलाकारों ने अपने नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। इसके बाद हरियाणवी पणिहारी नृत्य से हरियाणा के कलाकारों ने कुंए पर पानी भरने जाती महिलाओं द्वारा की जाने वाली अठखेलियों को प्रस्तुत किया। उत्तर प्रदेश के पूर्वी नृत्य के माध्यम से भी कलाकारों ने फसल कटाई के समय किसानों के मनोरंजन व उनकी थकान दूर करने के लिए किए जाने वाले नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके साथ ही हरियाणवी कलाकार कोमल जब मेरा दामण सिमादे ओ ननदी के बीरा गीत पर प्रस्तुति दे रही थी, तो दर्शकों ने कलाकार की खूब हौंसला अफजाई की। हरियाणवी परिधान में सजी महिला कलाकार ने अपने पैरो की थिरकन से ऐसा समां बाधां की सभागार तालियों से गूंज उठा। इसके बाद उत्तरप्रदेश के झूमर नृत्य में महिला कलाकारों ने होली के दौरान किए जाने वाले नृत्य को प्रस्तुत किया। फूलों के साथ होली का दृश्य दिखाते हुए प्रयागराज के कलाकारों ने बंसत उत्सव को खुशनुमां बना दिया। अंतिम प्रस्तुति हरियाणवी गीत बन्ना गिरी छवारे छोले पर बनड़ी ना बोले की रही। मनोज व साथी कलाकारों ने पति-पत्नी की नोकझोंक को नृत्य के माध्यम से बखूबी प्रस्तुत किया। अंत में मुख्यअतिथि डा. अशोक शर्मा ने सभी कलाकारांे को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। वहीं नागेंद्र शर्मा ने मुख्यअतिथि को स्मृति चिन्ह भेंटकर आभार जताया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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