वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में मिली शिवलिंग जैसी रचना के आसपास की जगह अभी संरक्षित बनी रहेगी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को आगे बढ़ा दिया है. सुप्रीम कोर्ट 17 मई को दिए आदेश में शिवलिंग के आसपास की जगह संरक्षित रखने का आदेश दिया था.

पुराने आदेश की समय सीमा 12 नवंबर तक थी

हिंदू पक्ष का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि केस की मैन्टेनबलिटी पर जिला जज के आदेश के आठ हफ्ते बाद तक उसका आदेश जारी रहेगा. 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें मुस्लिम पक्ष ने दावा किया था कि ज्ञानवापी परिसर में पूजा अर्चना के अधिकार वाली हिंदू पक्ष की याचिका सुनवाई के लायक ही नहीं है.

हिंदू पक्ष की दलील

हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि जिला जज का आदेश 12 सितंबर का है, इस लिहाज से आठ हफ्ते का वक्त गुजर गया है. ऐसे में शिवलिंग को संरक्षित रखने के आदेश की समय सीमा 12 नवंबर को खत्म हो रही है. रंजीत कुमार की ओर से ये भी कहा गया कि एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली मस्जिद कमेटी की याचिका अब निष्प्रभावी हो चुकी है. उस पर अब सुनवाई के कोई औचित्य नहीं है.

मुस्लिम पक्ष की दलील
मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील हुजेफा अहमदी ने कहा कि शिवलिंग जैसी संरचना को संरक्षित रखने के पुराने आदेश को अगर सुप्रीम कोर्ट बरकरार रखता है तो उन्हें इस पर कोई ऐतराज नहीं है. पर ये कहना कि एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका निष्प्रभावी हो गई है, गलत है. उस याचिका को निष्प्रभावी नहीं कहा जा सकता. अभी तक हिंदू पक्ष ने जवाब दाखिल नहीं किया है.

दोनों पक्षों को जवाब दाखिल करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति पर सवाल उठाने वाली याचिका पर हिंदू पक्ष को 3 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा. उन दलीलों को जवाब देने के लिए मुस्लिम पक्ष को 2 हफ्ते का वक्त दिया.

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