Category: National

ढाका में बदलाव की हवा, भारत के सामने नई कसौटी

(सत्रह वर्षों बाद सत्ता में लौटी बीएनपी ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा बदली है; भारत के सामने अब अवसरों के साथ नई अनिश्चितताएँ भी खड़ी हैं।) — डॉ. प्रियंका…

ट्रेड डील सहित अन्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन             

करनाल, 16 फरवरी  : करनाल में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा विभिन्न जनसमस्याओं व मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन ट्रेड डील, बुढ़ापा पेंशन…

चुनाव के बाद चुप्पी: क्या राइट टू रिकॉल समय की मांग है?

—डॉo सत्यवान सौरभ लोकतंत्र का मूल सिद्धांत यह है कि सत्ता जनता के हाथों में निहित होती है और निर्वाचित प्रतिनिधि जनता के सेवक होते हैं। चुनाव इसी व्यवस्था का सबसे…

कोचिंग संस्कृति और बच्चों की मौतें: सफलता के नाम पर असफल समाज

– डॉ० प्रियंका सौरभ कोटा में एक और छात्रा की आत्महत्या—यह कोई साधारण खबर नहीं है और न ही किसी एक परिवार की निजी त्रासदी भर। यह उस शिक्षा व्यवस्था,…

क्यों गायब हो रहे बच्चे?

(हरियाणा में हर दिन औसतन 12 बच्चे लापता—क्या यह सिर्फ गुमशुदगी है या संगठित मानव तस्करी का खामोश जाल?) घर से निकले बच्चे जब वापस नहीं लौटते, तो सवाल सिर्फ…

प्रकृति, पैसा और स्वास्थ्य: एक संतुलित दृष्टि

– डॉ० प्रियंका सौरभ आज के दौर में स्वास्थ्य को लेकर हमारी सोच तेजी से बदली है। आधुनिक जीवनशैली, तकनीक, महंगी चिकित्सा सुविधाएँ और बढ़ती आय ने यह विश्वास पैदा…

देश के कुल दूध उत्पादन का 36 प्रतिशत उत्पादन कर रहा है अकेला हरियाणा प्रदेश : राजीव रंजन सिंह

-हरियाणा नस्ल की गाय ने पूरी दुनिया में विख्यात होकर प्राप्त की ख्याति -केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज्य मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने केडीबी…

इलाज के नाम पर लूट

(देश की हॉस्पिटल व्यवस्था में मुनाफ़ाख़ोरी, इंश्योरेंस और सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग और आम आदमी की बेबसी) – डॉ० प्रियंका सौरभ आज देश की हॉस्पिटल व्यवस्था जिस हालत में पहुँच…

मासिक धर्म और सैनिटरी पैड: स्कूलों में गरिमा की परीक्षा

– डॉ. प्रियंका सौरभ सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूलों में छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने और मासिक धर्म स्वच्छता को अनिवार्य करने संबंधी निर्देश केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं…

नर्सरी से कॉलेज तक, एडमिशन की युद्धभूमि

(दाख़िले की दौड़ में बच्चों पर बढ़ता दबाव और प्रतिस्पर्धा) – डॉ० सत्यवान सौरभ आज शिक्षा का अर्थ सीखना नहीं, बल्कि साबित करना हो गया है। साबित करना कि बच्चा…