Category: Dharam-Adhyatam

श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी की प्रेरणा से काम्यकेश्वर तीर्थ पर कल लगेगा शुक्ला सप्तमी मेला

काम्यकेश्वर तीर्थ पर शुक्ल सप्तमी पर स्नान करने से होती है मोक्ष की प्राप्ति कुरुक्षेत्र, 2 मई : श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी की प्रेरणा से तीर्थों की…

मंत्रोच्चारण के साथ जग ज्योति दरबार में भीषण गर्मी के बीच महंत राजेंद्र पुरी ने शुरू की राष्ट्रहित की कामना से पंच धूणी कठोर अग्नि तपस्या

करीब दो दशकों से भीषण गर्मी में हर वर्ष आग की धूणी (ढेरों) के बीच कठोर अग्नि तपस्या करते हैं महंत राजेंद्र पुरी कुरुक्षेत्र, 1 मई : हर वर्ष की…

पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों में निहित है विश्व कल्याण और शांति का मार्ग:मैथ्यू हितकारी

पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों में निहित है विश्व कल्याण और शांति का मार्ग:मैथ्यू हितकारी ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया संसदीय क्षेत्र के सांसद मैथ्यू हितकारी ने किया गीता स्थली ज्योतिसर और…

श्रीमद्भगवद् गीता एवं भरतमुनि नाट्यशास्त्र को यूनेस्को द्वारा मान्यता मिलना भारतीय ज्ञान परंपरा का सम्मान

यूनेस्को  की पहल से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की विश्व में बढ़ेगी पहचान 19 अप्रैल: श्रीमद्भगवद् गीता एवं भरतमुनि नाट्यशास्त्र को यूनेस्को की 74 डॉक्यूमेंट्री हेरिटेज कलैक्शन में शामिल करना वास्तव में भारतीय ज्ञान परंपरा का सम्मान है। यह उद्गार संस्कृति प्रेमी एवं लोक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक प्रो. महासिंह पूनिया ने यूनेस्को द्वारा पांडुलिपियों की पंजीकृत सूची में भारतीय ज्ञान परंपरा के दोनों ग्रन्थों को शामिल करने के पश्चात कहे। उन्होंने कहा कि गीता एक ऐसा ग्रन्थ है जिस का विश्व की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। भरतमुनि नाट्यशास्त्र सांस्कृतिक दृष्टि से भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक इतिहास का का एक ऐसा ग्रन्थ है जिस को विद्वानों ने पांचवे वेद की संज्ञा दी है। समस्त भारतवासियों के लिए यह गौरवमयी उपलब्धि है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया यह प्रयास वैश्विक स्तर पर गीता एवं नाट्यशास्त्र की गरिमा को नई पहचान देगा। यह पहचान हर उस भारतीय की है जो भारत की ज्ञान परंपरा पर गर्व एवं गौरव महसूस करता है। इस उपलब्धि पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि श्रीमद्भगवद् गीता के 18 अध्यायों में जीवन का सार है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा के अनुसार गीता का स्थान वही है जो उपनिषद एवं धर्मसूत्रों का है। उपनिषदों को जहां गायं कहा गया है वहीं पर गीता को उसके दुग्धरूपी सार की संज्ञा प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि उपनिषदों की जो अध्यात्म विद्या थी उसी को गीता में प्रस्तुत कर पूरे विश्व को एक ऐसा ग्रन्थ मिला है जो सब के लिए अनुकरणीय है। डॉ. पूनिया ने बताया कि भरतमुनि का नाट्यशास्त्र जो प्रदर्शन कलाओं पर एक प्राचीन ग्रन्थ है। यह ग्रन्थ 36 अध्यायों में विभाजित है। इस ग्रन्थ में नाटक के अभिनय, रस, संगीत और मंचन पर विस्तार से चर्चा की गई है। लोकजीवन में इसे पांचवे वेद की संज्ञा भी दी गई है। दोनों ही ग्रन्थों का यूनेस्को की पांडुलिपि ग्रन्थ सूची में शामिल होना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का अवसर है। उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय द्वारा की गई यह पहल आने वाले दिनों में भारतीय सांस्कृतिक एवं ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित करेगी।

शिवलिंग पर बेल पत्र अर्पित करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती : शास्त्री

दुखभंजन मंदिर में शिव भक्तों ने की पूजा अर्चना कुरुक्षेत्र। प्रसिद्ध दु:खभंजन मंदिर में सोमवार को हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। शिव भक्तों ने सबकी सुख-शांति के लिए पूर्ण…

भारत विकास परिषद ने हनुमान जयंती एवं बैसाखी पर प्रसाद वितरित किया

 भारत विकास परिषद ने हनुमान जयंती एवं बैसाखी पर प्रसाद वितरित किया डॉ. राजेश वधवा कुरुक्षेत्र।  हनुमान जयंती एवं बैसाखी के शुभ अवसर पर धर्म नगरी कुरुक्षेत्र के पवित्र ब्रह्म…

श्री दक्षिणमुखी प्राचीन हनुमान मंदिर, ब्रह्मसरोवर में धूमधाम से मनाया गया हनुमान जन्मोत्सव

पंडित प्रेम कुमार शर्मा द्वारा हुआ सुंदरकांड पाठ, विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब डॉ. राजेश वधवा कुरुक्षेत्र। ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण श्री दक्षिणमुखी प्राचीन हनुमान मंदिर,उत्तरी…

हनुमत भक्ति करने वाले साधक पर हर समय बरसती है बजरंगी की कृपा : पंडित सुशील शास्त्री

कुरुक्षेत्र। श्रीलक्ष्मी रामलीला ड्रामाटिक क्लब की ओर से दुखभंजन मंदिर में श्रीराम भक्त हनुमान जयंती बड़े हर्र्षोल्लास से मनाई गई। क्लब की ओर सभी की सुख शांति के लिए हवन-यज्ञ…

(नया भारत और फुले का सपना) “ज्योतिबा फुले का भारत बनाना अभी बाकी है”

फुले केवल उन्नीसवीं सदी के समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि वे आज भी जाति, लिंग और वर्ग आधारित असमानताओं के खिलाफ एक जीवंत विचारधारा हैं। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक समानता…

आज के दौर में भगवान महावीर के विचारों की प्रासंगिकता

— एक नैतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की पुकार आज के भौतिकवादी और असहिष्णु समय में भगवान महावीर के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय…