श्री दुर्गा देवी मन्दिर के अध्यक्ष व कॉस्मिक एस्ट्रो पिपली (कुरुक्षेत्र) के निदेशक ज्योतिष व वास्तु आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि वैदिक शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार सनातन धर्म में एकादशी के दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही जीवन में आध्यत्मिक उन्नति और सुख-शांति, समृद्धि की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली निर्जला एकादशी 18 जून,2024 मंगलवार को है। इस व्रत को ‘देवव्रत’ भी कहा जाता है क्योंकि सभी देवता, दानव, नाग, यक्ष, गन्धर्व, किन्नर, नवग्रह आदि अपनी रक्षा और श्रीविष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी का व्रत करते हैं।

 
सभी एकादशियों में श्रेष्ठ महत्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का है। इसे निर्जला, पांडव और भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। निर्जला एकादशी को भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस एक दिन के व्रत से सम्पूर्ण वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिलता है।
 
 
भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं ?
 

महाभारत की एक प्रचलित कथा के अनुसार भीम ने एकादशी व्रत के संबंध में वेदव्यास से कहा था मैं एक दिन तो क्या, एक समय भी खाने के बिना नहीं रह सकता हूं, इस कारण से मैं एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त नहीं कर संकूगा। तब वेदव्यास ने ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी के बारे में बताया। उन्होंने भीम से कहा कि तुम इस एकादशी का व्रत करो। इस एक व्रत से तुम्हें सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाएगा। भीम ने इस एकादशी पर व्रत किया था, इसी कारण से इसे भीमसेनी एकादशी कहते हैं।

 निर्जला  एकादशी क्यों कहते हैं  और क्या करें ? 

इस तिथि पर निर्जल रहकर यानी बिना पानी पिए व्रत किया जाता है मनसा वाचा कर्मणा शुभ भावना रखें।

इसीलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। व्रत करने वाले भक्त पानी भी नहीं पीते हैं। सुबह-शाम भगवान विष्णु की पूजा करते हैं I अगले दिन द्वादशी तिथि पर पूजा-पाठ और ब्राह्मण को भोजन करवाने के बाद खुद भोजन ग्रहण करते हैं।  इस व्रत में बहुत गर्मी के बीच पानी नहीं पीने के कारण कठिन व्रत माना जाता है। 

इस दिन भगवान विष्णु का मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ” का जाप करना बहुत शुभ होता है। निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले रंग के कपड़े, फल और अन्न अर्पित करना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा के उपरांत इस चीजों को किसी ब्राह्मण को दान देना चाहिए।

इस एकादशी पर श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी उत्तम होता है। अगर निर्जला एकादशी का व्रत न भी कर पाएं तो इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करें। गुप्त दान एक हाथ से किया दूसरे हाथ को भी पता न चले I  इस दिन गाय सेवा ,जीव जन्तुओं और असहायों की सेवा , गरीबों और ब्राह्मणों को कपड़े, छाता, जूता, फल, मटका, पंखा, शर्बत, पानी, चीनी आदि का दान श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए। भगवान को श्रद्धा और भक्ति ही प्रिय लगती है I 

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

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